दशकों से सीएचसी चक्की में नहीं हैं महिला डॉक्टर, एएनएम के भरोसे होता है प्रसव

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के दावों की हकीकत चक्की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में साफ नजर आ जाती है.

चक्की़ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के दावों की हकीकत चक्की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में साफ नजर आ जाती है. करोड़ों रुपये खर्च कर भव्य भवन तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों की कमी ने इसे नाम मात्र का अस्पताल बना दिया है. हालात यह है कि दशकों से इस अस्पताल में एक भी महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिससे क्षेत्र की हजारों महिलाएं बुनियादी इलाज से भी वंचित हैं. प्रखंड वासियों के दर्जनों गांवों के लिए यही एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है. रोजाना बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या भी कम नहीं होती. लेकिन महिला डॉक्टर के अभाव में महिलाओं को मजबूरी में पुरुष चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ता है. संकोच में दब जाती है बीमारी : महिला मरीजों का कहना है कि पुरुष डॉक्टरों के सामने वे अपनी समस्याएं खुलकर नहीं बता पातीं है. इलाज कराने आई सुमन देवी, गायत्री देवी, सुलेखा देवी और सोनम देवी ने बताया कि महिला रोगों से जुड़ी बातें पुरुष चिकित्सक से कहना बेहद असहज होता है. लज्जा वस कुछ खुलकर कह नहीं पाते हैं. संकोच के कारण सही इलाज नहीं मिल पाता, जबकि महिला डॉक्टर से वे अपनी समस्या सहजता से साझा कर सकती हैं. महिला डॉक्टर का काम कर रहीं एएनएम : सबसे गंभीर और चौंकाने वाली स्थिति यह है कि महिला चिकित्सक के अभाव में प्रसव कार्य भी एएनएम के भरोसे चल रहा है. सीएचसी प्रभारी चिकित्सक डॉ अंजनी कुमार ने स्वयं स्वीकार किया कि अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं होने के कारण एएनएम द्वारा ही प्रसव कराया जाता है. यदि मामला गंभीर रहता है तो उस मरीज को अनुमंडल या सदर अस्पताल भेज दिया जाता है. वहीं महिलाओं के सामान्य व गंभीर रोगों का इलाज पुरुष डॉक्टर ही करते हैं. उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में दशकों से महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गयी है. इसका सीधा असर यह है कि गर्भवती महिलाओं और महिला मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, जहां उन्हें भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है. दो डॉक्टरों के सहारे चल रहा करोड़ों का अस्पताल : करीब एक साल पहले दियारा क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से नए अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था. अस्पताल के अंदर हर तरह के संसाधन भी उपलब्ध कराया गया, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके. लेकिन हकीकत यह है कि यह विशाल अस्पताल मात्र दो चिकित्सकों के सहारे चल रहा है. इसमें भी एक प्रभारी हैं जिनको लगभग हर दिन जिला में मीटिंग या अन्य कार्यों को लेकर बाहर जाना पड़ता है. इस स्थिति में अस्पताल में एक ही डाक्टर रह जाते हैं. ऐसे में लाजमी है कि एक ही डाक्टर सभी रोगों का इलाज करते हैं. इसमें महिला व पुरुष दोनों शामिल हैं. सरकारी दावों पर उठते सवाल : चक्की सीएचसी की बदहाल व्यवस्था सरकार के स्वास्थ्य संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. करोड़ों की लागत से बना अस्पताल महिला चिकित्सक, पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ के बिना खुद इलाज का मोहताज बना हुआ है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ग्रामीण और दियारा क्षेत्र की महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधा कब नसीब होगी? क्या बड़े-बड़े इमारत बनाना ही स्वास्थ्य सेवाएं है. क्या कहते हैं अधिकारी केवल भवन बना देने से स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत नहीं होतीं. बेहतर इलाज के लिए पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी जरूरी हैं. उन्होंने बताया कि मैन पावर बढ़ाने को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. डॉ अंजनी कुमार, स्वास्थ्य चिकित्सा प्रभारी, चक्की

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Published by: Amlesh prasad

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