शाहाबाद में MLC उपचुनाव पर धनबल का साया: ‘सर्टिफिकेट जब्ती’ और वोट खरीद के आरोपों से गरमाई राजनीति

Bihar News: बक्सर और भोजपुर इलाके में हो रहे विधान परिषद उपचुनाव को लेकर वोट खरीद, जनप्रतिनिधियों के प्रमाण पत्र जमा कराने और धनबल के इस्तेमाल के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. चुनावी मैदान में वोट के बदले नोट और सर्टिफिकेट राजनीति की चर्चा तेज हो गई है.

Bihar News: (संतोष कांत की रिपोर्ट) बक्सर और भोजपुर में हो रहे विधान परिषद उपचुनाव को लेकर वोट खरीद, जनप्रतिनिधियों के प्रमाण पत्र जमा कराने और धनबल के इस्तेमाल के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. चुनावी मैदान में वोट के बदले नोट और सर्टिफिकेट राजनीति की चर्चा तेज हो गई है.

MLC उपचुनाव में सर्टिफिकेट राजनीति की चर्चा

भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव में इस बार चुनावी मुकाबला केवल प्रचार और वादों तक सीमित नहीं दिख रहा है. बल्कि धनबल और कथित खरीद-फरोख्त के आरोपों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इलाके में चर्चा है कि पंचायत प्रतिनिधियों- मुखिया, वार्ड सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधियों – के वोट हासिल करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. आरोप है कि कुछ प्रत्याशी समर्थकों द्वारा जनप्रतिनिधियों से उनके मूल जीत प्रमाण पत्र तक जमा कराए जा रहे हैं.

वोट के बदले पैसे और उपहार देने के आरोप

सूत्रों के अनुसार, चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए नकद राशि, महंगे मोबाइल फोन और अन्य सुविधाएं देने की बातें सामने आ रही हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मतदान से पहले एडवांस राशि दी जा रही है और बाकी भुगतान वोटिंग के बाद करने की बात कही जा रही है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन इलाके में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है.

एक ही सर्टिफिकेट कई जगह जमा होने की चर्चा

चुनावी माहौल में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने कथित तौर पर अलग-अलग खेमों में प्रमाण पत्र जमा कर कई पक्षों से लाभ लेने की कोशिश की है. बताया जा रहा है कि रंगीन फोटोकॉपी और मूल प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के जरिए भ्रम की स्थिति पैदा हुई है. इससे प्रत्याशी और उनके चुनावी प्रबंधन से जुड़े लोग भी असमंजस में पड़ गए हैं.

सर्टिफिकेट जब्ती के पीछे रणनीति क्या?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रमाण पत्र जमा कराने के पीछे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है. माना जा रहा है कि इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि संबंधित जनप्रतिनिधि किसी दूसरे पक्ष के संपर्क में न जाए. इसी कारण चुनावी खेमों में ‘राजनीतिक बाड़ेबंदी. जैसे शब्द भी चर्चा में हैं.

12 मई को मतदान, लोकतंत्र पर उठ रहे सवाल

अब सबकी नजर 12 मई को होने वाले मतदान पर टिकी है. इलाके में यह बहस तेज हो गई है कि चुनाव विकास और जनहित के मुद्दों पर होगा या फिर धनबल और प्रभाव के आधार पर. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से निष्पक्ष मतदान कराने का दावा किया जा रहा है.

जनता की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर

चुनाव को लेकर फैल रही चर्चाओं और आरोपों के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्रवाई पर है. यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है.

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By Ragini Shamra

Ragini Shamra is a contributor at Prabhat Khabar.

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