विरोध. अपने हल के लिए भूधारी किसानों ने बैठक कर सरकार के खिलाफ खोला मोरचा
सरकार के ढुलमूल रवैये के कारण फंस सकता है एनएच 84 के चौड़ीकरण का कार्य
डुमरांव : अपनी कीमती जमीनों का व्यवसायी दर पर मुआवजा नहीं मिलने पर किसान आक्रोशित हैं. ऐसी स्थिति में एनएच 84 सड़क के दोहरीकरण का मामला बाधक बन सकता है. किसान अब चरणबद्ध आंदोलन के मूड में हैं.
रविवार को जिला भूमि अधिग्रहण संघर्ष समिति के बैनर तले भूधारी किसानों ने पुराना भोजपुर के शिवमंदिर में बैठक कर अपने हक के लिए सड़क पर उतरने का निर्णय लिये. बैठक की अध्यक्षता त्रिवेणी मिश्रा व संचालन अनिल कुमार राय ने किया. किसानों को संबोधित करते हुए बैठक के अध्यक्ष श्री मिश्रा ने कहा कि सरकार के ढूलमूल रवैये के कारण मुख्य सड़क से सटे 42 मौजा के किसानों के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं. किसानों ने अपनी पीड़ा को जिलाधिकारी के समक्ष रखा था, लेकिन वरीय अधिकारियों के साथ-साथ सूबे की सरकार ने भी कोई ठोस पहल नहीं की. सरकार के अधिग्रहण में किसानों के मकान व दुकान भी शामिल हैं, लेकिन सरकार जमीन का प्राकृत बदलाव कर कम रेटों पर मुआवजा का प्रस्ताव रखा है,
जिसे किसानों ने लेने से इनकार कर दिया. बैठक को भाजपा जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह, बृजराज ओझा, श्रीनाथ ओझा, काशीनाथ सिंह भिरूग सिंह आदि ने भी संबोधित किया. बैठक में मौजूद किसानों ने कहा कि हम अपने हक के लिए सड़क पर उतरने का निर्णय लेते हुए चरणबद्ध आंदोलन के लिए रूप रेखा तय किये हैं. सरकार अगर समय से राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर काम शुरू करना चाहती है और सही मायने में किसानों की हितैसी है, उसे हमारी कीमती जमीनों का सही से मुआवजा देना होगा़ नहीं हम किसान अपनी कीमती जमीन को कौड़ी के भाव नहीं देंगे और इसके लिए हमेशा आंदोलन करते रहेंगे़ मौके पर रामव्यास, वेदव्यास, शिवमंगल यादव, मुसाफिर सिंह, वीरेंद्र सिंह, भोला पासवान सहित अन्य लोग शामिल थे.
