बक्सर : कदी की संकट से अब बक्सर के बाजार उबरने लगे हैं. दुकानदारों ने कैशलेस व्यवस्था की ओर कदम बढ़ा लिये हैं. दुकानदार से लेकर ग्राहक तक अब नगदी के बजाय पेटीएम और स्वैप मशीनों के जरिये भुगतान कर रहे हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि इसमें उधार का कोई रोना नहीं होता है.कैशलेश सिस्टम अब शहर और गांवों के बाजारों में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है. अब तक सैकड़ों दुकानदारों ने स्वैप मशीन लगाने को लेकर बैंकों में आवेदन दिये हैं. नोटबंदी के बाद धीरे-धीरे बक्सर के बाजार कैशलेस की तरफ बढ़ने लगे हैं. किराना और मिठाई दुकानदार भी स्वैप के जरिये ग्राहकों से पैसा ले रहे हैं.
उनका कहना है कि ग्राहक सामान लेने के बाद उतना पैसा स्वैप के जरिये दे देता है और वह पैसा सीधे खाते में जमा हो जाता है. यह बहुत ही आसान और सुविधाजनक तरीका है. इसमें ग्राहक को नगदी की समस्या से निजात मिलती है. स्टेशन रोड स्थित मिठाई दुकानदार अरुण कुमार ने बताया कि नोटबंदी के बाद से हमने ग्राहकों के लिए पेटीएम और स्वैप मशीन लगा लिया है. आज कल हर एक व्यक्ति के पास एंड्रायड मोबाइल फोन हैं और लगभग सभी इंटरनेट का उपयोग भी करते हैं.
पेटीएम एप्लीकेशन की मदद से कुछ ही सेकंड के अंदर खरीदे गए सामान की कीमत का भुगतान आसानी से किया जा सकता है. कैशलेस की दिशा में कदम बढ़ाते हुए दुकानदार अब पूरी तरह से कैशलेस होना चाह रहे हैं.इसको लेकर लगभग डेढ़ सौ दुकानदारों ने बैंकों में स्वेप मशीन लगाने के लिए आवेदन दिया है. नोटबंदी के बाद से उनके व्यवसाय पर काफी असर पड़ा था. जिसके बाद उनकी आमदनी काफी हद तक कम होने लगी थी. लेकिन स्वैप मशीन लगने के बाद अब धीरे-धीरे उनकी आमदनी भी बढ़ने लगी है. ग्राहक रघुवीर सिंह ने कहा कि वे अब जेब में रुपये नहीं बल्कि मोबाइल लेकर चलते हैं. इससे सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी प्रकार के पैसा छीनने का डर नहीं रहता है.
