नोटबंदी के पेच में फंसा नौनिहालों का पाैष्टिक पोषाहार

जनधन खाते में शामिल होने से पोषाहार पर संकट जिले के 60 प्रतिशत केंद्रों की राशि की निकासी नहीं बक्सर : नोटबंदी के बाद से ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का संकट हो गया है. जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्र इसका दंश झेल रहे हैं. इसका बुरा असर नौनिहालों, गर्भवती, किशोरी और धातृ […]

जनधन खाते में शामिल होने से पोषाहार पर संकट

जिले के 60 प्रतिशत केंद्रों की राशि की निकासी नहीं
बक्सर : नोटबंदी के बाद से ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का संकट हो गया है. जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्र इसका दंश झेल रहे हैं. इसका बुरा असर नौनिहालों, गर्भवती, किशोरी और धातृ महिलाओं पर पड़ रहा है. दरअसल, हुआ यह कि आंगनबाड़ी केंद्रों का खाता शून्य बैलेंस एसबी (सेविंग बैंक) 124 के तहत खाता खोला गया. नोटबंदी के बाद ये सारे खाते जनधन योजना में शामिल हो गये. ऐसे में इस खाते से एक माह में दस हजार की ही निकासी हो सकती है, जिसके कारण सेविकाएं पूरी राशि नहीं निकाल पा रही है. ऐसी स्थिति में पोषाहार बांटना असंभव हो गया है. विभाग ने सभी के खाते में पैसे को ट्रांसफर तो कर दिया,
लेकिन नोटबंदी के पेंच में नौनिहालों के पोषाहार पर ब्रेक लग गया. हालांकि कई सेविकाओं के स्वयं के खाते होने के कारण वे राशि निकालने में सक्षम रहीं. ये खाते मिनिमम बैलेंस चार्ज रखने की शर्त पर खोला गया था. पोषाहार की राशि नहीं निकलनेवाले खाते करीब 60 प्रतिशत हैं, जिसके लिए हर दिन सेविकाएं बैंक का चक्कर लगा रही है. बावजूद इसके निकासी नहीं हो पा रही है. उल्लेखनीय है कि जिले में 1539 आंगनबाड़ी केंद्र है. प्रत्येक केंद्र 24 हजार की राशि की निकासी करते हैं.
खाते को किया जा सकता है ट्रांसफर : शुरुआती दौर में ऐसी स्थिति आने पर विभाग ने बैंकों के पदाधिकारियों से मिल कर इस समस्या से अवगत कराया था. पर जब बैंक पदाधिकारियों ने बताया कि जिनका खाता शून्य बैलेंस से खोला गया है. वह एसबी 124 के अंतर्गत जन-धन खाते में शामिल हो गया है, जिससे पूरी राशि की निकासी संभव नहीं है. ऐसे में बैंकों ने यह भी सुझाव दिये थे कि ऐसे खाते को एसबी 101 में ट्रांसफर कर राशि की निकासी की जा सकती है. पर समस्या यह थी कि एसबी 101 में ट्रांसफर करने पर मिनिमम बैलेंस चार्ज कटेगा. बैंक ऑफ बड़ौदा के पदाधिकारी आरएस तिवारी ने बताया कि आइसीडीएस विभाग से ट्रांसफर करने की बात कही गयी थी. पर ट्रांसफर नहीं कराया गया.
क्या है केंद्र का उद्देश्य : आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा देना, कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी देना, बच्चों को पौष्टिक आहार देना व एक केंद्र में कम से कम 30 बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराना है पर बाल विकास परियोजना की इस लचर व्यवस्था से आंगनबाड़ी केंद्र अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल साबित हो रहे हैं.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
बैंक पदाधिकारियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कहा जायेगा, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण शुरू हो सके. नोटबंदी के कारण ऐसी समस्या उत्पन्न हुई है.
शशिकांत पासवान, डीपीओ, आइसीडीएस
आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या
प्रखंड संख्या
बक्सर 230
चौसा 82
राजपुर 167
इटाढ़ी 137
डुमरांव 199
नावानगर 138
ब्रम्ह्पुर 163
सिमरी 182
चक्की 34
केसठ/चौंगाई 71

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