कवायद. उपभोक्ताओं को अब मिलेगा उचित मात्रा में अनाज
तराजू की होगी नियमित जांच, प्रतिनियुक्त होंगे अधिकारी
बक्सर : जिले में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की सूरत बदलने वाली है. विभाग के निर्देश पर जिले की सभी पीडीएस दुकानों पर इलेक्ट्राॅनिक तराजू लगेंगे. विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में ऐसे कई पीडीएस दुकानें हैं, जहां इलेक्ट्राॅनिक तराजू से मापतौल कर उपभोक्ताओं को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन, अब पूरे जिले में पीडीएस दुकानों पर इलेक्ट्राॅनिक तराजू रखना अनिवार्य होगा. खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद जनवितरण प्रणाली को भ्रष्टाचार मुक्त और शिकायत रहित करने के लिए राज्य सरकार लगातार नये पहलुओं पर कार्य कर रही है. सरकार के निर्देश पर विभाग तैयारी में जुट गया है.
इस बाबत जिला आपूर्ति पदाधिकारी शिशिर कुमार मिश्रा ने बताया कि कई ऐसी शिकायतें आती हैं कि दुकानों पर खाद्यान्न उचित मात्रा में नहीं दिया जा रहा है. इलेक्ट्राॅनिक तराजू लगने के बाद ऐसी शिकायतें नहीं आयेंगी. वहीं, दुकानों पर इलेक्ट्राॅनिक तराजू से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाये, इसके लिए अधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया जायेगा, जो मशीन की नियमित जांच करेंगे.
आने वाले दिनों में होगा कायाकल्प : राज्य सरकार पीडीएस दुकानों का पूरी तरह से कायाकल्प करने वाली है. इसके लिये पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम किये जा रहे हैं. आने वाले दिनों में दुकानों पर चीनी, चाय, कपड़ा, दूध, साबुन आदि उपलब्ध हो सकेंगे. इसके लिए कई बड़ी एजेंसियों से बातचीत चल रही है. इस व्यवस्था में आगामी दिनों आपूर्ति विभाग केवल उत्प्रेरक का काम करेगी. विभाग के गोदाम में कंपनियां होल सेल रेट या उत्पादन मूल्य पर सामग्री उपलब्ध करायेगी, जिसे पीडीएस दुकानों पर पहुंचाया जायेगा. उसके बाद उपभोक्ताओं को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जायेगा.
784 पीडीएस दुकान, नौ लाख 95 हजार उपभोक्ता : विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल 784 दुकानों पर नौ लाख 95 हजार 35 उपभोक्ता आश्रित हैं. अब तक कुल एक लाख 62 हजार 480 राशन कार्ड निर्गत किये गये हैं. वितरण पर नजर रखने के लिए विभाग के कुल 46 वाहनों को पूरी तरह से जीपीएस से लैस किया जा चुका है, जिसकी मॉनीटरिंग एसएफसी व जिला आपूर्ति विभाग के द्वारा की जा रही है.
कार्डधारियों का डाटा हुआ ऑनलाइन : खाद्य सुरक्षा योजना के सभी लोगों का डाटा पूर्व में कंप्यूटराइज्ड हो चुका है.
विभागीय सूत्रों के अनुसार इस डाटा के साथ उपभोक्ताओं का आधार नंबर और बैंक अकाउंट भी जोड़ा जा रहा है. इसके साथ ही सभी जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों को कंप्यूटराइज्ड करने का निर्देश दिया गया है. जल्द ही दुकानों को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया जायेगा. उपभोक्ताओं को बायोमीटरिक प्रणाली के आधार पर खाद्यान्नों का उठाव कराया जायेगा. जैसे ही लाभुक का अंगूठा लगेगा उसका पूरा डिटेल्स सामने आ जायेगा.
दोहरा लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं पर कसेगी नकेल : विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में ऐसे भी कई उपभोक्ता हैं, जो दो-दो पीडीएस दुकानों से राशन-केराेसिन का उठाव करते थे. विभाग के सूत्रों के अनुसार उपभोक्ताओं के आधार नंबर को राशन कार्ड से लिंक करने के बाद ऐसे उपभोक्ताओं का कूपन रद्द किया जा चुका है. फिलहाल ऐसे उपभोक्ताओं को चिह्नित किया जायेगा. उसके बाद उन्हें नोटिस किया जायेगा. यदि ऐसे उपभोक्ता अपनी करतूतों से बाज नहीं आये, तो उन पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जायेगी.
उद्देश्य कालाबाजारी रोकना : जन वितरण प्रणाली में सबसे ज्यादा धांधली दुकानदारों के स्तर से होती है. उसका लाभ ऊपर के लोगों को पहुंचता है. जानकारी के अभाव में दुकानदार उपभोक्ता को अनाज नहीं आवंटित होने की बात कह टाल देते हैं. इस तरह साल के चार-पांच महीने उपभोक्ताओं को सस्ते दर का अनाज नहीं मिल पाता. यही अनाज बाजार में आम दरों पर बिकने के लिए पहुंच जाता है. बायोमीटरिक तकनीक का इस्तेमाल कर वास्तविक लाभुक को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए किया जाएगा.
पीडीएस दुकानों पर लगेंगे इलेक्ट्राॅनिक तराजू
क्या कहते हैं अधिकारी
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र परिवारों के खाद्यान की हेराफेरी या कालाबाजारी करने वाले पीडीएस दुकानदारों पर पैनी नजर रखी जायेगी. राज्य सरकार जन वितरण प्रणाली को पूरी तरह से स्वच्छ व सुदृढ़ बनाने वाली है. इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम किया जा रहा है, जिसे जल्द ही पूरे सूबे में क्रियान्वित किया जायेगा.
शिशिर कुमार मिश्रा, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, बक्सर
