देखरेख करनेवालों के नाम की गयी शहनाई वादक बिस्मिल्ला की जमीन

डुमरांव : डीएम रमण कुमार पिछले साल उस्ताद के खंडहरनुमा जमीन पर पहुंच मुहल्ले व केयर टेकर से मिले थे. इस बाबत उन्होंने कहा था कि अगर उस्ताद के परिजन जमीन मुहैया कराएं, तो संग्रहालय बनाने की पहल की जायेगी. एक साल बितने के बाद प्रशासन ने इस पर पहल करना मुनासिब नहीं समझा. जब […]

डुमरांव : डीएम रमण कुमार पिछले साल उस्ताद के खंडहरनुमा जमीन पर पहुंच मुहल्ले व केयर टेकर से मिले थे.
इस बाबत उन्होंने कहा था कि अगर उस्ताद के परिजन जमीन मुहैया कराएं, तो संग्रहालय बनाने की पहल की जायेगी. एक साल बितने के बाद प्रशासन ने इस पर पहल करना मुनासिब नहीं समझा. जब जमीन बिक्री व अतिक्रमण का मामला प्रकाश में आया, तो जिला व अनुमंडल प्रशासन के कान खड़े हो गये. अब देखना यह कि बिहार सरकार, जिला व अनुमंडल प्रशासन उस्ताद की जमीन को कितना संरक्षित कर पाती है. उस्ताद बिस्मिल्ला खान की बेटी कनीजा फातिमा और बेटे नाजिब खान कहते हैं कि राज्य सरकार और प्रशासन ने अभी तक उस्ताद की स्मृति में कुछ नहीं किया. उस्ताद को अपने घर में भरपूर सम्मान मिलना चाहिए. परिवार की सहमति से देखरेख करनेवालों के नाम जमीन की गयी है.
वहीं, सुल्तान खां व सुबहान खां कहते हैं कि बिहार सरकार उस्ताद की पैतृक जमीन पर संग्रहालय या कोई यादगार बनाती है, तो हम सहयोग करेंगे. जमीन के एवज में उस्ताद के बेटा व बेटी ने फूटी कौड़ी तक नहीं ली. बिस्मिल्ला खान की जमीन मई महीने में रजिस्ट्री हो गयी. सितंबर माह के अंतिम सप्ताह सुबहान खान ने अतिक्रमण करने को लेकर स्थानीय थाना में प्राथमिक दर्ज करायी. उसके बाद से खान की जमीन पर जिले भर चर्चा हो रही है.
उस्ताद के परिजनों के मुताबिक बिना पैसे लिए केयर टेकर को भूमि का मालिक बनाया गया, जिससे भूमि सुरक्षित रह सके. दूसरी तरफ विश्व विख्यात शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खान की जमीन पर उनके सम्मान में संग्रहालय एवं यादगार भवन बनाने को लेकर बिहार प्रदेश जदयू आदिवासी प्रकोष्ठ के पूर्व महासचिव सह प्रवक्ता नथुनी प्रसाद खरवार ने सूबे के मुखिया नीतीश कुमार से संग्रहालय एवं यादगार भवन बनाने की मांग को लेकर बुधवार की देर शाम फैक्स किया. उस्ताद ने अपने वंशज के नाम से डुमरांव नगर के भीरूग राउत की गली सर्वे वार्ड संख्या छह जो वर्तमान में 10 है, कबाला द्वारा जमीन खरीदी थी. जो नया सर्वे में भू-स्वामी के स्थान पर अनावाद बिहार सरकार हो गया. कैफियत कालम में भी किसी का नाम नहीं है, जिसका खाता संख्या 394, खेसरा संख्या २१४९, एराजी ०५ हेक्टेयर किस्म खंड है. श्री खरवार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रशासनिक कब्जा कर उनके याद में संग्रहालय एवं यादगार भवन बनाना जरूरी है.

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