बक्सर : जिले में भ्रष्टाचार को जड़ से हटाने के बजाये जिला प्रशासन मामले की लिपापोती कर रहे हैं. घोटाले में संलिप्त अधिकारी पर कार्रवाई करने की जगह उन्हें फिर से घोटाला करने का अवसर दिया जा रहा है. नजारत घोटाले में संलिप्त अधिकारियों को एक बार फिर घोटाला करने के लिये बाढ़ राहत कार्य में लगाया गया है. उक्त बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व संगठन सचिव टीन चौबे ने पत्र जारी कर कहा. टीएन चौबे ने कहा कि छात्रवृत्ति घोटाले के 22 आरोपितों में से अब तक 2 को ही जेल भेजा गया है.
बाकी बचे आरोपितों को बचाने में जिला प्रशासन लगी हुई है. वहीं, सवा करोड़ के नजारत घोटाले का आरोपित जेल में बंद है, तो दूसरे ने अपनी जुबान डीएम के निर्देश पर नहीं खोली है. मामले में कई आला अधिकारी संलिप्त है. न्यायालय में जब अभियुक्त ने समर्पण किया था, तो कहा था कि कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे. तीन माह बीतने के बाद आनन-फानन में जिला प्रशासन ने प्रधान नाजीर कन्हैया लाल को निलंबित कर दिया.
डीएम रमण कुमार ने सामान्य विभाग के प्रधान सचिव को तत्कालीन एनडीसी राजेश कुमार एवं नासीर अहमद पर कार्रवाई करने की मांग की थी. बावजूद इसके एनडीसी राजेश कुमार को बाढ़ में राहत कार्य की जिम्मेदारी दी गई है. बाढ़ राहत कार्य में 1 हजार कि्वंटल राशन, दाल, आलू आदि बांटने की जिम्मेदारी डीएम ने उन्हें सौंपी है. यह तो शेर के सामने मांस रखने के बराबर है. इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि एक बार फिर घोटालों का सिलसिला शुरू होगा. मामले पर टीएन चौबे ने डीएम से विचार करने की अपील की है.
