कुरसी बरकरार. शह-मात के खेल में इफ्तेखार ने एक वोट से मारी बाजी
वोटिंग में इफ्तेखार को 17 व विपक्ष के उम्मीदवार इकबाल को मिले 16 वोट
बक्सर : नगर पर्षद की उपाध्यक्ष की कुरसी पर इफ्तेखार अहमद ने फिर से कब्जा जमा लिया. 26 दिनों तक चले शह-मात के खेल में इफ्तेखार ने विपक्षी खेमे को फिर से धुल चटा दी. उपाध्यक्ष को लेकर करायी गयी वोटिंग में इफ्तेखार ने एक वोट से बाजी मार ली. एक अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव में उपाध्यक्ष की कुरसी छीन गयी थी. उसके आलोक में शनिवार को समाहरणालय के सभागार में चौक-चौबंद और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चुनाव कराया गया. इसमें सत्ता पक्ष की ओर से इफ्तेखार. जबकि विपक्षी खेमे की ओर से राम इकबाल चुनावी अखाड़े में थे.
इस दौरान इफ्तेखार को 17 वोट मिले. जबकि राम इकबाल को 16 वोट प्राप्त हुए. एक वोट को रद्द कर दिया गया. इस तरह इफ्तेखार ने राम इकबाल को पटखनी देकर नगर पर्षद में फिर से अपना परचम लहरा दिया. तय कार्यक्रम के अनुसार चुनाव की प्रक्रिया सुबह ग्यारह बजे से शुरू हुई. सभी पार्षद सभागार में पहुंचे और फिर सत्ता पक्ष की ओर से इफ्तेखार अहमद और विपक्ष से वार्ड छह के पार्षद राम इकबाल सिंह ने उप मुख्य पार्षद के लिए परचा भरा. दोनों पार्षदों के लिए वोटिंग हुई. उल्लेखनीय है कि नगर में कुल 34 वार्ड हैं.
इस खबर के सुनते ही समाहरणालय के बाहर इफ्तेखार अहमद के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गयी. समर्थक एक दूसरे को जीत की बधाई दे रहे थे. इधर, विपक्ष चुपचाप सभागार से निकल पड़ा. सभागार में नव निर्वाचित उप मुख्य पार्षद को पद की शपथ दिलायी गयी. चुनाव की सारी प्रक्रिया सदर अनुमंडल पदाधिकारी गौतम कुमार के मौजूदगी में संपन्न हुई. शांति व्यवस्था को बहाल करने के लिए मुख्य गेट पर ही तीन मजिस्ट्रेट 50 पुलिस बल के जवानों के साथ तैनात थे. वहीं, समाहरणालय के 250 गज की रेडियस में धारा 144 लागू थी.
नगर पर्षद की राजनीति में फिर चला इफ्तेखार का सिक्का : पिछले दस साल से उप मुख्य पार्षद की कुरसी पर कब्जा जमानेवाले इफ्तेखार अहमद का शनिवार को भी नगर पर्षद की राजनीति में सिक्का चल गया. करीब 26 दिनों तक चली राजनीतिक उठा-पटक के बीच शनिवार को इफ्तेखार ने अपनी चाल से विपक्षी खेमे को फिर से मात दे दी. नगर उपाध्यक्ष इफ्तेखार अहमद की इस राजनीतिक चाल की पूरे शहर में चर्चा हो रही है.
शहरवासियों को यह समझ में नहीं आ रहा कि आखिर 26 दिनों पहले कुरसी गवानेवाले इफ्तेखार को आज फिर से उपाध्यक्ष का ताज कैसे हासिल हो गया. बता दें कि उपाध्यक्ष के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के आलोक में एक अगस्त को मत विभाजन कराया गया था, उस समय इफ्तेखार अहमद को महज दो सदस्यों का ही समर्थन प्राप्त हुआ था. नतीजा हुआ कि उनकी कुरसी छीन गयी, लेकिन इन 26 दिनों में ही उन्होंने ऐसी चाल चली की उनके समर्थकों की संख्या 17 तक पहुंच गयी और उन्होंने एक बार फिर से उपाध्यक्ष की कुरसी हथिया ली.
कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव हुआ संपन्न
जीत का इजहार करते पार्षद.
विपक्ष ने दी कड़ी टक्कर
भले ही इफ्तेखार अहमद ने उपाध्यक्ष की कुरसी को जीत लिया हो, पर पिछले दिनों की अपेक्षा उनकी ताकत कम हुई है. पूर्व में जब भी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है, तब उनके समर्थकों की संख्या 26 से 27 रही है, पर इस बार उन्हें 17 पार्षदों का ही समर्थन मिल पाया है.
ऐसे में इस कुरसी पर काबिज होने के बाद भी उनकी शक्ति घटी है. इधर, उप मुख्य पार्षद पद के लिए इफ्तेखार अहमद को कड़ी टक्कर देनेवाले वार्ड छह के पार्षद राम इकबाल सिंह के समर्थकों की संख्या बढ़ी है. राम इकबाल अपने वार्ड में दो टर्म से पार्षद रहें हैं. विपक्ष ने इस बार इनको कड़ी टक्कर दी थी. इफ्तेखार अहमद वार्ड नंबर 26 के पार्षद हैं. ये अपने वार्ड में तीन टर्म से पार्षद हैं.
