बक्सर : पापा उठो ना पापा, क्यों नहीं उठ रहे हो. देखो ना मम्मी पापा को क्या हो गया है. कुछ बोल नहीं रहे हैं. शहीद अनिल सिंह की बेटी आकांक्षा अपने पापा को कुछ इसी तरह जगा रही थी. शायद उसे पता नहीं था कि उसके पापा हमेशा के लिए सो गये हैं. पांच साल की आकांक्षा की हालत देख मौजूद लोगों का कलेजा फटा जा रहा था. लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसे किस तरह संभाला जाये. बाद में किसी तरह गोद में उठा कर उसके बड़े पापा घर में ले गये. मंगलवार की रात जब शहीद का पार्थिव शरीर डुमरांव स्थित उनके घर पहुंचा, तो कोहराम मच गया.
.. देखो ना मम्मी, पापा नहीं उठ रहे
बक्सर : पापा उठो ना पापा, क्यों नहीं उठ रहे हो. देखो ना मम्मी पापा को क्या हो गया है. कुछ बोल नहीं रहे हैं. शहीद अनिल सिंह की बेटी आकांक्षा अपने पापा को कुछ इसी तरह जगा रही थी. शायद उसे पता नहीं था कि उसके पापा हमेशा के लिए सो गये हैं. पांच […]

मां व चाचा के साथ बेटी आकांक्षा भी दरवाजे पर पहुंच गयी. वहां जैसे ही तिरंगे से लिपटे ताबूत को गाड़ी से उतार कर नीचे रखा गया, शहीद को देखने को लेकर भीड़ लग गयी. इस बीच अपने पापा को बक्से में देख आंकक्षा रोने लगी. वह पापा को जगाने का प्रयास करने लगी. बार-बार मम्मी से पूछ रही थी कि बताओ न पापा को क्या हुआ है. उनको बक्से में क्यों रखा गया है. कोई उनको जगा क्यों नहीं रहा है.
मम्मी से लगातर पूछ रही थी कि तुम क्यों रो रही हो. इसके बाद दौड़ कर बड़े पापा के पास पहुंची और पूछने लगी कि सब क्यों रो रहे हैं. परंतु उसके प्रश्न का जवाब देने की हिम्मत शायद किसी में नहीं थी. वहीं उसका दो साल का भाई अभिनव मां के पास खड़ा होकर सबको एकटक निहार रहा था. उसे तो शायद पता भी नहीं था कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया है.