अनदेखी. मेंटेनेंस के अभाव में शहर के पार्कांे की स्थिति खराब
नाथ मंदिर स्थित वाटिका में बंद रहता है ताला
लोगों ने कहा, न तो प्रशासन को चिंता, न ही नगर पर्षद को है शहर के लोगों की सेहत की चिंता
बक्सर : शहर में बने पार्कों की स्थिति बहुत ही खराब है़ सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है. नगर पर्षद के द्वारा सफाई के लिए कोई राशि खर्च नहीं की जाती, जिसके कारण पार्कों की स्थिति बदतर हो गयी है. नगर पर्षद के सफाई इंस्पेक्टर इशरत हुसैन खां ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से पार्कों के रख-रखाव व उसके सौंदर्यीकरण के लिए अब तक कोई आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है. समय-समय पर नगर पर्षद के ही सफाई कर्मियों से पार्कों की सफाई करा दी जाती है. शहर में छोटे-बड़े कुल पांच पार्क हैं. इमने मुख्य तीन ही पार्क हैं. पहला नगर भवन स्थित उद्यान, दूसरा शहीद भगत सिंह पार्क व तीसरा नाथ मंदिर स्थित विष्णु वाटिका. साथ ही कमलदह पोखरा व नयी बाजार में चिल्ड्रेन पार्क बनाया गया है.
गंदगी के कारण लोगों का आना हुआ कम : नगर भवन स्थित उद्यान में महात्मा गांधी नगर, स्टेशन रोड, कलेक्ट्रेट रोड व ज्योति प्रकाश चौक के लोग सुबह शाम-टहलने के लिए आते हैं. स्टेशन रोड के राजेंद्र केसरी ने बताया कि पहले की अपेक्षा लोगों का आना अब कम हो गया है. पूर्व में यहां रोजाना 400 से 450 लोग आते थे. लेकिन, अब 300 लोग ही आते हैं. गंदगी के कारण पार्क से लोगों की रुचि अब नहीं रह गयी.
पार्क नहीं खुलने के कारण नहीं जा पाते हैं लोग : नाथ मंदिर स्थित विष्णु वाटिका खुलता ही नहीं है, जिसके कारण यहां लोग टहलने के लिए नहीं जा पाते़ वाटिका के पास चरित्र वन, श्मशान मोड़, धोबीघाट आदि मुहल्ले हैं. चरित्र वन मुहल्ले में रहनेवाले बरुणा पंचायत के पूर्व मुखिया सुरेश कुमार ने बताया कि रोजाना लगभग पांच लोग सुबह-शाम टहलते और योगाभ्यास करते हैं. लेकिन, वाटिका में टहलने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी, जिसके कारण वाटिका अधिकतर बंद ही रहती है.
शहीद भगत सिंह पार्क में नहीं है कोई सुविधा : शहीद भगत सिंह पार्क में सुविधाओं की कमी के कारण लोगों का आना-जाना कम रहता है. शहीद भगत सिंह पार्क के पास के दुकानदार दिलीप कुमार रस्तोगी ने बताया कि पार्क में ठेलेवालों का कब्जा हो गया है, जो अपने सामान के साथ कचरा पर फेंक देते हैं़ इससे आम जनता को काफी परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि न तो टहलने के लिए रैंप है और न ही व्यायाम करने के लिए स्टेज.
जिला प्रशासन को नहीं है चिंता: शहर के आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के योग शिक्षक दीपक पांडेय ने बताया कि शहर में पार्क को लेकर न तो जिला प्रशासन चिंतित है और न ही नगर पर्षद. पूर्व की अपेक्षा स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है. ऐसे में शहर में कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
शहर में अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) योजना के तहत पार्क विकास योजना पर काम किया जा रहा है. पार्क के सौंदर्यीकरण व जीर्णोंधार के लिए 50 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे. जल्द ही शहरों की पार्क को एक नया रूप दिया जाएगा.
अनिल कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, बक्सर
