तैयारी. शहर के नालों के पानी का होगा ट्रीटमेंट, शुद्ध कर बनाया जायेगा प्रदूषणमुक्त
अब बक्सर शहर का गंदा पानी गंगा नदी में सीधे नहीं गिरेगा. गंगा नदी को स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की गंगा को लेकर बनायी गयी महत्वाकांक्षी योजना नमामी गंगे के तहत शहर के सभी नालों के पानी को स्वच्छ बनाने के लिए गंगा नदी के किनारे एक बड़ा सा वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बानाने के तैयारी चल रही है, जिसमें गंदे पानी को प्रदूषण मुक्त बना कर गंगा नदी में गिराया जायेगा.
बक्सर : प्रधानमंत्री के नमामी गंगे योजना के तहत गंगा नदी में बक्सर शहर का गंदा पानी जाने से अब रोका जायेगा. इसके लिए वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की तैयारी चल रही है, जिसे वर्ष 2018 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय की पहल पर ‘नमामी गंगे’ के तहत बक्सर के उत्तरी छोर पर स्थित गंगा नदी पर वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा.
प्लांट के जरिए गंगा नदी में मिलनेवाले सभी ऑउट फॉल नालों से ठोस कचरे व हानिकारक रसायनों को निकाला जायेगा. उसके बाद स्वच्छ पानी को गंगा नदी में जाने दिया जायेगा. योजना के तहत अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए बक्सर शहर के सभी नालों व ऑउटफॉल नालों में सर्वे का काम शुरू किया जायेगा.
डायवर्ट किये जायेंगे आउटफॉल नालों के रुख : गंगा नदी में मिलनेवाले सात आउटफॉल को डाइवर्ट किया जायेगा. विभागीय सूत्रों के अनुसार गंगा नदी में कुल 11 आउटफॉलों का गंदा पानी गिरता है. यह योजना अविरल गंगा, निर्मल गंगा के लिए शुरू की गयी है. इसके लिए गंगा नदी के सभी घाटों जैसे सती घाट, रामरेखा घाट, नाथ बाबा घाट, रानी घाट, जहाज घाट, गोला घाट व श्मशान घाट का मुआयना किया जायेगा और आउटफॉलों को डाइवर्ट किया जायेगा, ताकि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में आउटफॉल नालों से निकलनेवाले पानी का ट्रीटमेंट किया जा सके.
सभी आउटफॉल नालों से होगा ठोस कचरे की उड़ाही : नगर पर्षद के अधिकारियों ने बताया कि शहर के सभी आउटफॉल नालों से गंगा नदी में शहर का गंदा पानी गिरता है. योजना के तहत गंगा नदी में गंदा पानी गिरने से पहले सभी ऑउटफॉल नालों से ठोस कचरे को निकालने की व्यवस्था होगी. इसके पहले ठोस कचरों की उड़ाही पहले ही कर ली जायेगी, ताकि, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में ठोस कचरा का अत्यधिक दबाव नहीं बढ़ सके. उसके बाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में नालों के पानी से हानिकारक रसायनों को निकाला जायेगा. इसके बाद गंगा नदी के पानी को कृषि योग्य बनाया जा सकेगा.
नहीं हुआ है भूमि का चयन : शहर में वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अब तक भूमि का चयन नहीं हुआ है. फिलवक्त सर्वे शुरू करने की तैयारी की जा रही है. सरकार से प्राप्त निर्देशों के अनुसार सर्व प्रथम सरकारी भूमि का चयन किया जाना है. इसलिए सरकारी भूमि को प्राथमिकता देते हुए प्लांट के लिए जमीन की तलाश करनी है. सर्वे के बाद शहर के सेंट्रल नाला, ऑउट फॉल नालों व नालियों की क्षमता के अनुसार प्लांट की रूपरेखा तय की जायेगी.
नगर पर्षद को योजना की मंजूरी का इंतजार
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना करके शहर के नालों व ऑउटफॉल नालों का दूषित पानी शुद्ध करके गंगा नदी में बहाव की व्यवस्था की जायेगी. परिषद को अब इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने का इंतजार है. प्लांट के लिए भूमि की तलाश की जा रही है. फिलवक्त, इस प्रोजेक्ट के तहत नालियों, नालों व आउटफॉल नालों का सर्वे का काम बुडको द्वारा कराये जाने की तैयारी चल रही है.
अनिल कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद
सभी आउटफॉल नालों से िनकाला जायेगा कचरा
गंगा नदी के किनारे देखी जा रही है भूमि
नगर निगम के सिटी मैनेजर शेखर कुमार ने बताया कि गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने व पानी को कृषि योग्य बनाने के लिए यह योजना तैयार की जा रही है. वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए अब तक भूमि का चयन नहीं हुआ है, लेकिन गंगा नदी के किनारे ही भूमि देखी जा रही है. फिलहाल योजना के लिए डीपीआर तैयार नहीं हुई है. इस बाबत स्थानीय सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि नमामी गंगे योजना के तहत केंद्र सरकार के स्तर से ही डीपीआर तैयार की जायेगी.डीपीआर तैयार करने के लिए सर्वे का काम चालू होनेवाला है. सर्वे के लिए एजेंसी का चयन हो चुका है.
