व्यवसाय की हैं अपार संभावनाएं
ब्रह्मपुर : बक्सर जिले के ब्रह्मपुर व चक्की प्रखंड के बीच करीब 25 किलोमीटर के दायरे मे फैला गोकुल जलाशय जल विहीन होते जा रहा है़ प्रखंड के उतरी क्षेत्र मे इसके किनारे बसेे गांव के लोग बतख पालन व मछली पालन सहित कई प्रकार के जलीय कृषि करके अपना जीविकोपार्जन करते थे. आज यही जलाशय जगह-जगह सूख चला है़ इस पर अगर सरकार ध्यान दें तो जिले का मुख्य पर्यटन क्षेत्र एवं जलीय व्यवसाय का केन्द्र बन सकता है़ जरूरत है सरकार को इस पर पहल कर कार्य रूप देने की़ गोकुल जलाशय का इतिहास बहुत पुराना है. करीब 70 बर्ष पूर्व गंगा नदी यही से होकर बहती थी.
कालांतर मे गंगा नदी ने अपना रास्ता बदल लिया, जो इलाके के उतर से अपना रास्ता बना लिया. ऐसे में इस जलाशय का नाम गोकुल जलाशय हो गया. यहां के लोग आज भी इसे गंगा जैसा पवित्र मानते है़ इलाके का मुंडन और दाह संस्कार आज भी इसी पवित्र जलाशय के किनारे किया जाता है़ प्रखंड के बलुुआ गांव निवासी शिवजी सिंह ने गोकुल जलाशय के विकास के लिए 10 बषोंर् से प्रयासरत है़ स्थानीय प्रशासन के साथ साथ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है. अगर सरकार इस पर ध्यान दे तो निम्न व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है.
यहां यह हैं संभावनाएं
गोकुल जलाशय में प्रतिवर्ष साइबेरियन पक्षी लाखों की संख्या में आते हैं. साथ ही बारहसिंहा, हरिण एवं कृष्णमृग यहां विचरण करते अक्सर देखे जा सकते हैं.
बक्सर से गोकुल जलाशय की दूरी 35 किमी़, रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन से 7 किमी़, टुंडीगंज से 15 किमी है़
राष्ट्रीय स्तर का तैराकी प्रशिक्षण स्थल
राष्ट्रीय स्तर का नौकायन प्रशिक्षण स्थल
आपदा प्रशिक्षण स्थल
मछली व झींगापालन व प्रशिक्षण स्थल
मखाना की खेती
कृत्रिम तरीके से मोतीपालन
कमल के फूल व सिघाड़ा की खेती
प्रवासी पक्षी बिहार व कृष्ण मृग संरक्षण स्थल
क्या कहते हैं अधिकारी
वास्तव मे गोकुल जलाशय को पर्यटन एवं जलीय व्यवसाय के रूप में विकसित किये जाने की जरूरत है. अगर ऐसा होता है तो इस क्षेत्र के बेरोजगारों के लिए रोजगार का सृजन होगा़ इसका प्राक्कलन तैयार कर जिलाधिकारी के पास भेजा जायेगा़
भगवान झा, बीडीओ
