उपेक्षा. मंडी में नहीं है एक भी शौचालय, व्यवसायियों व ग्राहकों को परेशानी
शाहाबाद की पुरानी व्यवसायी मंडी में न शौचालय की व्यवस्था है, न मूत्रालय की, जबकि मंडी के व्यवसायियों द्वारा दो लाख रुपये पेशा कर दिये जाते हैं. हालांकि वर्ष 2014 में खाली पड़ी जमीन पर शौचालय व मूत्रालय निर्माण का प्रस्ताव आया था, परंतु नगर पर्षद प्रशासन ने प्रस्ताव को खारिज कर जमीन को लीज पर दे दिया. इससे मंडी में आनेवाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है.
जगह का अभाव बता नगर पर्षद कर देता है हाथ खड़ा
खाली पड़ी 75 वर्ग फुट जमीन दे दी गयी लीज पर
डुमरांव : मुख्य मंडियों में शौचालय व मूत्रालय की व्यवस्था नहीं है. इससे व्यवसायियों समेत खरीदारी करने आये ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं, शहर में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहने से बाहर से आनेवाले लोगों के समक्ष कभी-कभी विकट समस्या उत्पन्न हो जाती है.
आज के व्यस्त जीवनशैली में छोटी-बड़ी खरीदारी करनी होती है, तो ज्यादातर महिलाएं ही बाजार जाती हैं. इस परिस्थिति में मंडी में शौचालय व मूत्रालय नहीं रहने से कभी-कभी महिलाओं को शर्मसार होना पड़ता है. हालांकि इस मुद्दे पर स्थानीय दुकानदारों ने गंभीर समस्या मानते हुए अनेकों बार नगर पर्षद प्रशासन से शिकायत कर सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की, परंतु हर बार जगह का अभाव बता कर नगर पर्षद ने हाथ खड़ा कर दिया.
निर्माण का आया प्रस्ताव तो जमीन दे दी लीज पर : मुख्य मंडी राज गोला के पीछे नप की खाली पड़ी करीब 75 वर्ग फुट जमीन लीज पर दे दी गयी. इसके एवज में नप को हर वर्ष करीब 45 हजार रुपये की आमदनी होती है, जबकि शहर की मुख्य मंडी स्थित जमीन पर शौचालय व यूरिनल की व्यवस्था की जाती, तो दुकानदारों, ग्राहकों व अन्य आने-जानेवाले लोगों को काफी राहत मिलती. साथ ही नप की आमदनी में वृद्धि भी होती.
स्वच्छता का उड़ रहा मखौल : केंद्र व राज्य सरकार स्वच्छता पर जोर दे रही है. इसके लिए जागरूकता व स्वच्छता अभियान चलाये जा रहे हैं. जिनके घरों में शौचालय नहीं है, उन्हें अनुदान देकर निर्माण कराने के लिए सरकार प्रोत्साहित कर रही है. लेकिन, नगर पर्षद इसके प्रति गंभीर नहीं है. नतीजा लोग जरूरत पड़ने पर यत्र-तत्र कहीं भी मल-मूत्र त्याग करने को बाध्य हैं. इससे वातावरण भी दूषित हो रहा है और गंदगी के कारण लोगों में तरह-तरह के बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है.
नगर पर्षद शिकायत पर गंभीर नहीं है
शहर की कुल आबादी
85 हजार 686
दुकानों की संख्या
1305
पेशा कर से नगर पर्षद को आमदनी
02 लाख
मकानों की संख्या
15 हजार
गृह कर से आमदनी
05 लाख
जमीन बंदोबस्ती से आय
60 हजार
(नप द्वारा दिया गया अनुमानित आंकड़ा)
क्या कहते हैं व्यवसायी
नगर पर्षद को समय पर कर का भुगतान करते हैं. लेकिन, सुविधा को लेकर ख्याल नहीं रखा जाता है. मंडी में यूरिनल व शौचालय का निर्माण बेहद जरूरी है. इसके नहीं रहने से कभी-कभी बहुत परेशानी होती है.
संजीव गुप्ता
मंडी में आयी महिला ग्राहकों को काफी मुश्किलें होती हैं. यहां न शौचालय की व्यवस्था है और न ही यूरिनल की. इसका व्यापार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
गोल्डेन जायसवाल
स्थानीय मंडी से नगर पर्षद को हजारों रुपये की आमदनी होती है, लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. जमीन के अभाव का बहाना बना कर खाली पड़ी जमीन नगर पर्षद प्रशासन ने लीज पर दे दी है.
कृष्णा कुमार
बाहर से आनेवाले यात्रियों को जरूरत पड़ने पर खाली जगह तलाशनी पड़ती है. नप प्रशासन को मूलभूत सुविधाओं का ख्याल रखना चाहिए.
ललन प्रसाद
बोर्ड की बैठक में आये प्रस्ताव की जानकारी नहीं है. खाली जमीन को लीज पर देने से राजस्व में बढ़ोतरी हुई है. अगली बैठक में इन बिंदुओं पर प्रस्ताव लाया जायेगा.
अनिल सिंह, सीटी मैनेजर, नगर पर्षद
यहां हजारों लोगों का प्रतिदिन होता है आना-जाना
यहां से यूपी व झारखंड समेत कई शहरों के लिए बसें खुलती हैं. वहीं, डुमरांव एक बड़ा रेलवे स्टेशन है. इससे सात प्रखंडों के लोग जुड़े हैं. यहां दर्जन भर मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव है. इसके अलावा यहां की मंडी में प्रतिदिन सामानों से भरी दर्जनों गाड़ियां पहुंचती हैं. अन्य कार्यों के लिए भी इस शहर में हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है, जिन्हें शौचालय व यूरिनल के अभाव में इधर-उधर भटकना पड़ता है.
