फोरम पर भरोसा. उपभोक्ता फोरम में बढ़ रहे विद्युत विभाग के मामले
विपत्र में मिल रही काफी गड़बड़ियां
एक महीने का विपत्र 50 हजार से एक लाख तक
एक लाख रुपये हर्जाना दिया बिजली विभाग ने
बक्सर, कोर्ट : लगातार घाटे का बोझ उठाने के बाद बिहार सरकार ने बिजली कंपनी का निजीकरण किया. साउथ बिहार पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने बिजली आपूर्ति का भार संभाला, लेकिन निजीकरण के बाद अचानक विद्युत संबंधित मामले बढ़ने लगे. विद्युत विपत्र में एक के बाद एक कई गड़बड़ियां देखने को मिलीं. निजी कंपनी ने कई उपभोक्ताओं को एक माह का विपत्र 50 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का थमा दिया़ उपभोक्ता बिल सुधरवाने के लिए विभाग का चक्कर लगाने लगे़ अधिकतर लोगों के विपत्रों में सुधार नहीं हुआ.
ऐसे में न्याय की आस में उपभोक्ताओं ने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद पत्र दाखिल करना शुरू. मई तक कुल 76 मामले दाखिल किये गये हैं, जिनमें एक तिहाई अकेले विद्युत विभाग के विरुद्ध हैं.
मीटर की गड़बड़ी भी बनता है गलत विपत्र का कारण : ऐसा देखने को मिला है कि विभाग द्वारा लगाये गये मीटरों में त्रुटियां मौजूद रहती हैं. बहुत दिनों से लगे पुराने मीटरों में ज्यादा गड़बड़ी रहती हैं. ऐसे में उनके द्वारा ली गयी रीडिंग के आधार पर जब विपत्र बनाया जाता है, तो उसमें गलत राशि का विपत्र निर्गत हो जाता है. जिला उपभोक्ता फोरम में इस तरह के कई मामले दाखिल किये गये हैं, जिसमें लक्ष्मण चौधरी, नंदलाल साहू, अरुण कुमार सिंह आदि उपभोक्ताओं के मामले हैं. जिन पर पहले से कोई विपत्र की राशि बकाया नहीं थी.
लेकिन, अचानक उन्हें 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख तक का विपत्र जारी किया गया था.
अत्यधिक लोड भी बनता है गलत विपत्र की वजह : विभाग द्वारा अमूमन सभी मकानों का लोड बढ़ाया गया था. इसका आकलन कई जगहों पर मकान की बनी ऊंचाइयों को देख बाहर से ही कर लिया गया था, जबकि ऊंचे भवन के बावजूद ऐसे कई मकान सामने आये, जिनमें रहनेवालों की संख्या बहुत कम थी. विभाग ने कई मकानों का लोड एक किलो वाट से बढ़ा कर दो या तीन किलो कर दिया था, जिसके बाद उपभोक्ताओं ने विभाग में यह आवेदन दिया कि उनके घर के भार की जांच कर ली जाये. जांच पर ऐसा पाया गया कि उक्त मकान में विद्युत का लोड कम है.
विभाग ने विपत्र में सुधार करते हुए लोड तो कम कर दिया, लेकिन बढ़ाये गये लोड की अवधि की राशि कम नहीं की, जिसके चलते उपभोक्ता फोरम में परिवाद पत्र दाखिल किये जाने लगे.
अधिकतर मामलों में विभाग पाया गया दोषी : जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा विद्युत विभाग के विरुद्ध दो दर्जन से ज्यादा आदेश 2015 एवं 16 में पारित किये गये हैं. लगभग सभी मामलों में विपक्षी विद्युत विभाग की सेवा में त्रुटि पायी गयी तथा उसे परिवादी के विपत्र में सुधार के साथ-साथ हर्जाना देने को आदेश किया गया. नया भोजपुर निवासी रामनाथ गुप्ता के परिवाद पत्र संख्या 1/2012 में फोरम ने उसकी बंद विद्युत आपूर्ति को चालू करने, सही विपत्र निर्गत करने के अलावा एक लाख 25 हजार रुपये बतौर हर्जाने के रूप में देने को आदेश दिया था,
जिसके बाद विद्युत विभाग ने उक्त मामले को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दे डाली. लेकिन, जिला फोरम के फैसले को लागू रखा गया सिर्फ हर्जाने की राशि को एक लाख 25 हजार से घटा कर एक लाख रुपये कर दिया गया. विपक्षी ने उसे राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नयी दिल्ली में चुनौती दी, लेकिन राष्ट्रीय आयोग ने रिवीजन को खारिज कर दिया. इसके बाद विद्युत विभाग ने परिवादी रामनाथ गुप्ता को एक लाख रुपये बतौर हर्जाना के रूप में दिया.
बिल नहीं देना चाहते हैं लोग : अभिषेक कुमार
इस संबंध में विद्युत विभाग के एसडीओ अभिषेक कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि सपोर्ट बिलिंग लागू की गयी है, ताकि घर-घर जाकर मीटर की रीडिंग करने के साथ ही उपभोक्ताओं को विपत्र निर्गत कर दिया जाये. उन्होंने बताया कि लोग विभाग का पैसा बकाया रखते हैं तथा उसे जमा नहीं करना चाहते.
