हर मर्ज में दी जा रही एक ही दवा

मनमानी. सदर अस्पताल में मरीजों को लिखी जा रही अस्कालिव सदर अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा मरीजों की मजबूरी से कोई लेना-देना नहीं है़ गरीब व मजबूर मरीज के पास पैसा रहे या ना रहे वे बीमारी ठीक करने के नाम पर बाहरी दवाओं को लिखना नहीं भूल रहे हैं. इससे गरीब व असहाय तबके के […]

मनमानी. सदर अस्पताल में मरीजों को लिखी जा रही अस्कालिव

सदर अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा मरीजों की मजबूरी से कोई लेना-देना नहीं है़ गरीब व मजबूर मरीज के पास पैसा रहे या ना रहे वे बीमारी ठीक करने के नाम पर बाहरी दवाओं को लिखना नहीं भूल रहे हैं. इससे गरीब व असहाय तबके के मरीज बहुत ही परेशान हैं.
बक्सर : सदर अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों द्वारा हर मर्ज की एक ही दवा लिखी जा रही है. उस दवा का नाम अस्कालिव है, जो लीवर टॉनिक है. लेकिन, ओपीडी में बैठे कुछ चिकित्सकों द्वारा ज्यादातर मरीजों के पुरजे पर इस दवा को लिख दिया जाता है. मरीज के मर्ज चाहे हाथ में खुजली हो, शरीर में खुजली हो, सर्दी हो, जुकाम हो, हड्डी में दर्द, जोड़ में दर्द समेत किसी भी तरह की बीमारी हो़ इलाज में दवा के साथ अस्कालिव लीवर टॉनिक निश्चित तौर पर लिखी जाती है. इसके पीछे राज क्या है, ये लिखनेवाले चिकित्सक ही बतायेंगे.
प्रतिदिन अस्पताल में आते हैं तीन से चार सौ मरीज : सदर अस्पताल में प्रतिदिन जिले से साढ़े तीन सौ से चार सौ मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ज्यादातर सामान्य चिकित्सा ओपीडी में ही मरीज पहुंचते हैं, जहां उनके दवा परची पर आवश्यक दवाओं के साथ एक लीवर टॉनिक अस्कालिव आवश्यक रूप से लिख दी जाती है.
220 रुपये की है दवा : अस्कालिव दवा काफी महंगी दवा है. 200 एमएल अस्कालिव दवा की कीमत 220 रुपये एवं 100 एमएल दवा की कीमत 115 रुपये है, जो सदर अस्पताल पहुंचनेवाले मरीजों के लिए खरीदना आसान नहीं है. चूंकि यह दवा सदर अस्पताल में सरकारी काउंटर पर नहीं मिलती. मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है. गरीब मरीज मजबूरी में इस महंगी दवा को खरीदते हैं.
अज्ञानतावश मरीज मजबूरी में खरीदते हैं महंगी दवा
क्या कहते हैं जानकार चिकित्सक
शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक आरके झा ने कहा कि ओरनिथीन नाम की दवा है, जो लीवर टॉनिक का काम करती है. यह दवा मिरगी, टीवी, पीलिया, लीवर खराब या लीवर से संबंधित गंभीर बीमारीवाले मरीजों को चलायी जाती है. ये सामान्य बीमारीवाले लोगों को नहीं चलायी जाती है. इस दवा को लीवर से संबंधित गंभीर बीमारी होने पर दो से छह महीने तक दी जा सकती है.
क्या कहते हैं दवा लिखनेवाले चिकित्सक
सदर अस्पताल के सामान्य चिकित्सा ओपीडी में तैनात डॉ बीएन चौबे रोगियों का इलाज कर रहे थे, जिनसे इस दवा के बारे में जानकारी ली गयी, तो उन्होंने कहा कि यह दवा शरीर के हर प्रकार की क्रियाओं को संचालित करती है़ शरीर का कोई भी अंग यदि काम कम करता है, तो उसको ये अस्कालिव दवा काफी सक्रिय कर देती है.
केस-1 : नगर के चरित्रवन निवासी रीता देवी पति दशरथ चौधरी को ठेहुना में दर्द की शिकायत है, जिसका इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंची थी. रीता देवी का रजिस्ट्रेशन नंबर डी-17528 है के पुरजे पर दवा के साथ अस्कालिव लीवर टॉनिक जोड़ के दर्द की दवाओं के रूप में लिखी हुई थी़
केस-2: इटाढ़ी प्रखंड के कुकुढ़ा निवासी रवि कुमार सिंह पिता सत्येंद्र सिंह को दिनाय एवं खुजली की बीमारी हुई है, जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर ए-17427 है के पुरजे पर अन्य दवाओं के साथ अस्कालिव लीवर टॉनिक दवा लिखी हुई थी़
केस-3 : सदर प्रखंड के बोक्सा निवासी रामाशंकर राम पिता स्व. सूबेदार राम, रजिस्ट्रेशन नंबर बी06300 है. जिनको सर्दी एवं जुकाम हुआ था. इनके भी पुरजे पर सर्दी-जुकाम की दवाओं के साथ लीवर टॉनिक अस्कालिव दवा के लिखी हुई थी़
केस-4 : सदर प्रखंड के अर्जुनपुर निवासी पुष्पा देवी पति लोकनाथ को सर्दी-जुकाम की बीमारी थी, जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर ए-16731 है के पुरजे पर सर्दी-जुकाम की दवा लिखी गयी थी, जो सदर अस्पताल में मौजूद था. साथ ही अस्कालिव लीवर टॉनिक इनके पुरजे पर भी लिखा गया था, जिसके बारे में वो नहीं जानती थी की यह दवा कैसी है.
केस-5 : सदर प्रखंड के गोविंदपुर निवासी दीपक कुमार पिता रामचंद्र को खुजली की बीमारी थी, जिसके इलाज के लिए वह सदर अस्पताल में आया था. उसका रजिस्ट्रेशन नंबर ए-17469 है. इसके भी पुरजे पर खुजली

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