पानी के लिए गांवों में मारामारी

समस्या. जल स्तर पांच से 10 मीटर नीचे गया, सूख गये चापाकल भूगर्भ जल के लेयर नीचे जाने से जिले में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है. इसके कारण सैकड़ों चापाकल सूख गये हैं. चापाकल गाड़ने में गहराई का ध्यान नहीं रखे जाने के कारण जल संकट पैदा हुआ. बक्सर जिले के लगभग सभी […]

समस्या. जल स्तर पांच से 10 मीटर नीचे गया, सूख गये चापाकल

भूगर्भ जल के लेयर नीचे जाने से जिले में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है. इसके कारण सैकड़ों चापाकल सूख गये हैं. चापाकल गाड़ने में गहराई का ध्यान नहीं रखे जाने के कारण जल संकट पैदा हुआ. बक्सर जिले के लगभग सभी प्रखंडों में पानी का लेयर नीचे चला गया है और लोग परेशानी झेल रहे हैं.
बक्सर : भूमिगत जलस्तर नीचे हो जाने से शहरी समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है. सूखे की समस्या से जूझ रहे लोगों को अब पेयजल संकट की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है़ समस्या इतनी गंभीर हो गयी है कि लगाये गये सादा चापाकल, तो बिल्कुल ही बंद हो गये हैं. जबकि सरकारी स्तर पर लगाये गये चापाकलों में कुछ ही चापाकल चल रहे हैं, जिसमें से पानी थोड़ा-थोड़ा करके आ रहा है.
हाल में हुई बारिश के बाद सूखे हुए कुछ चापाकल तो फिर से बहाल हो गये हैं, लेकिन कई चापाकलों से गंदगी युक्त पानी निकल रहा है. पानी का लेयर नीचे जाने से कई कुंओं की स्थिति भी सूखा जैसी हो गयी है. शायद ही कोई कुआं होगा, जो अपने अस्तित्व में बचा होगा.
20 से 50 फुट नीचे गया लेयर
20 से लेकर 50 फीट तक पानी का लेयर नीचे चला गया है, जिसके कारण आधे से अधिक चापाकल सूख गये हैं. नगर पर्षद की ओर से शहरी क्षेत्र में गाड़े गये करीब 350 चापाकलों में से आधे से अधिक खराब पड़े हैं. अब चापाकल गाड़ा जाना भी बंद है, जिससे शहरी क्षेत्र के लोग परेशान हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार वाटर सरफेस रिचार्ज नहीं हो पा रहा है तथा जल के अत्यधिक दोहन के कारण भू- गर्भ जल स्तर तेजी से गिर रहा है. कृषि की सिंचाई में जल का दुरुपयोग भी इसका प्रमुख कारण है. फसलों की बूंद-बूंद सिंचाई तथा बौछारी विधि से सिंचाई से जल की बरबादी काफी हद तक रोकी जा सकती है.
गांवों में समस्या गंभीर
राजपुर, धनसोई व केसठ प्रखंड समेत अन्य कई प्रखंडों में पेयजल की समस्या गंभीर बनी है. राजपुर क्षेत्र के नागपुर, रामपुर, गैधरा, हंकारपुर, खीरी, तियरा, अकबरपुर, बारूपुर, उतमपुर, हेंठुआ ,मंगरॉव, संगरॉव सहित अन्य सभी गांवों में पानी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. लोग अपने घर के नजदीक किसी दूसरे मुहल्ले में जाकर पानी भर रहे हैं. वहीं, इटाढ़ी प्रखंड में पेयजल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हाहाकार मचा है. प्रखंड के हकीमपुर, कुकुढ़ा, परासी, लोहन्दी, विझौरा आदि गांवों में इन दिनों चापाकल पानी देना बंद कर दिये हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए गांव में इधर-उधर भटकना पड़ता है. ब्रह्मपुर प्रखंड के उतरी एवं दक्षिणी दोनों ही भागों में जलस्तर के नीचे चले जाने से पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है़ प्रखंड की अठारह पंचायतों में लगे अधिकांश पुराने सरकारी चापाकल खराब हो चुके हैं.
असइएम टू व अइएम थ्री चापाकल दे रहे पानी

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