सिमटने के साथ सूखा भी

त्रासदी़. पूर्वजों के खुदवाये तालाबों पर कर लिया अतिक्रमण जल स्रोतों से निबटने के लिए पूर्वजों ने श्रमदान कर तालाबों को खुदवाया था़ लेकिन नयी पीढ़ी ने बरबादी की संस्कृति अपना कर वहां रिहायशी मकानों को खड़ा कर दिया़ पूर्व में शहर के दर्जनों तालाब पानी से लबालब हुआ करते थे़ आज पानी का एक […]

त्रासदी़. पूर्वजों के खुदवाये तालाबों पर कर लिया अतिक्रमण

जल स्रोतों से निबटने के लिए पूर्वजों ने श्रमदान कर तालाबों को खुदवाया था़ लेकिन नयी पीढ़ी ने बरबादी की संस्कृति अपना कर वहां रिहायशी मकानों को खड़ा कर दिया़ पूर्व में शहर के दर्जनों तालाब पानी से लबालब हुआ करते थे़ आज पानी का एक बूंद नहीं है. सरकार व सामाजिक उदासीनता ने अधिकतर तालाब व पोखर सूख गये हैं.
डुमरांव :तालाब, पोखर, ताल-तलैया व घरों के चापाकलों के जल स्तर नीचे चले जाने से लोगों में काफी चिंता है. बूंद-बूंद पानी बचाने को लेकर सरकार व सामाजिक संगठनों द्वारा लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है़ शहर के दर्जनों तालाब, पोखर, आज सूखने के कगार पर है़ं मॉनसून में बारिश का पानी होने से इस तालाबों में भर जाता था़ इस पानी से तालाबों के आसपास खेतों की सिंचाई होती थी़
मछुआरे तालाबों से मछली पकड़ कर जीविका चलाते थे़ तालाब की मिट्टी से कुम्हार साल भर अपने धंधे को आकार देता रहता था़ पास-पड़ोस के लोग कपड़े धोने से लेकर दैनिक जीवन के अनेक कामों को निबटाते थे.
तापमान के नियंत्रण में योगदान : तालाबों में मॉनसून का पानी जमा होने से भूगर्भ की निचली सतह में नमी बनी रहती है़ और कुछ क्षेत्र तक जल स्तर नीचे लुढ़कने पर काबू बना रहता है़ यह तालाब धरती की बढ़ती तापमान पर नियंत्रण रखता है़
पानी के बचाव के िलए चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
सिमट गयी तालाबों की भूमिका
जीवनदायी संरचना को लेेकर पूर्वजो ने जो जल संसाधन के तौर तरीके अपनाये थे़ उसे नयी पीढ़ी बेपरवाह होकर उसके बावजूद को मिटा दिया़ शहर के अधिकांश तालाबों में मिट्टी भराई के बाद रिहायशी मकान बन गये़ और जो बचे हैं उसका किनारा कटाई हो रहा है़ फिर भी समाज व सरकार इस मसले पर उदासीन बना है़
विशेष प्रबंधन की हो व्यवस्था
नगर के बुद्धिजीवी शिवजी पाठक, प्रदीप शरण आदि कहते हैं कि पानी के प्रति लोगों में सम्मान हो, गांव व टोलों का पानी गांव में ही रहने का प्रबंध करना चाहिए़ जल प्रबंधन व नियंत्रण के लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए़ अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव की मानें तो अब पानी के लिए लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है़
शहर में तालाबों की स्थिति
खिरौली पोखर वजूद खत्म
नया तालाब पानी नही
प्रखंड तालाब पानी नहीं
हरिजी तालाब वजूद खत्म
लोरिक तालाब पानी नहीं
छठिया पोखर सामान्य
ढेकवा पोखर वजूद खत्म
जंगली बाबा पोखर सामान्य
काली पोखर सामान्य
डुमरेजनी पोखर पानी नहीं

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >