हर कदम पर दिखी सदर अस्पताल में कमी
सीसी टीवी कैमरा सफेद हाथी साबित हुआ
बक्सर : सरस्वती देवी को शायद ही मालूम होगा कि जिस बच्चे के लिए नौ माह तक कष्ट सहा, उसको लेकर सपने संजोये वह पल भर में धराशायी हो जायेगा. इसके बारे में कभी सोचा नहीं था. सरस्वती को एक बच्चा दो वर्ष का है, जो बच्चा गायब हुआ वह उसका दूसरा बच्चा था. गुरुवार की सुबह एक बच्चा चोर महिला साड़ी पहनी प्रसूति वार्ड के सात नंबर कमरे में आयी और सभी प्रसूताओं से नाश्ता चाय मिलने की जानकारी ली.
फिर कुछ देर बाद एक रजिस्टर लेकर आयी और बारी-बारी से अन्य प्रसूताओं की जानकारी नोट की. पुन: तीसरी बार वह महिला कुछ देर बाद आयी और टीका दिलाने के नाम पर सरस्वती के बेटे को साथ ले गयी और परिजनों को वार्ड में ही रुकने को कहा और बच्चे को लेकर फरार हो गयी. खबर सुन कर छात्र नेता व स्थानीय लोगों ने सदर अस्पताल के पास सड़क जाम कर आंदोलन शुरू कर दिये.
घटना के जिम्मेवार कौन ? : सदर अस्पताल में सारी व्यवस्थाओं के जिम्मेवार स्वास्थ्य प्रबंधक होते हैं, जो इस समस्या से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं. साथ ही वार्ड में प्रसूताओं की सभी जिम्मेवारी ममता कार्यकर्ताओं की होती है, जिन्हें इस घटना के संबंध में भनक तक नहीं लगी. सभी अस्पताल कर्मी अपनी जिम्मेवारी से इनकार कर रहे हैं.
सीसी टीवी कैमरा मात्र सफेद हाथी : बच्चा चोर महिला को पकड़ने के लिए जब सीसी टीवी फूटेज की बात उठी, तो वह सफेद हाथी साबित हुआ. सीसी टीवी कैमरा तो चालू है, पर उसका फुटेज कहीं स्टोर नहीं होता है.आखिर लाखों में खर्च कर सीसी टीवी कैमरे लगाने की क्या औचित्य है यह प्रश्न उठता है. जबकि सदर अस्पताल की पूरी व्यवस्था की निगेहबानी के लिए आठ कैमरे लगाये गये हैं, जो सफेद हाथी के बन गये हैं.
ममता की थी ड्यूटी : सदर अस्पताल में घटना के समय शारदा, आरती एवं मंती तीन ममता कर्मियों की ड्यूटी थी, जो वार्ड से बाहर थीं. जबकि इनका दायित्व प्रसूताओं की सहायता की थी. लगभग बच्चा महिला चोर को सदर अस्पताल के स्टॉफ बनने में तीन बार वार्ड में आयी और विश्वास में ली. तब इस घटना को अंजाम दिया है. यदि ममता अपने दायित्व का निर्वहन करतीं, तो यह फर्जी स्टॉफ अंदर वार्ड में नहीं प्रवेश कर पाती.
घटना का चाइल्ड वेलफेयर ने लिया जायजा : सीडब्लूसी बक्सर की दो सदस्यीय टीम सदर अस्पताल पहुंच कर घटना का जायजा लिया. अस्पताल प्रबंधक व ममता कर्मियों से पूछताछ की. पीड़ित परिवार से भी टीम ने पूछताछ की. टीम में बाल कल्याण समिति सदस्य प्रतिमा सिंह एवं सोनी से भी गहन पूछताछ की.
पैसे देने पर होता है बच्चे का रजिस्ट्रेशन : सदर अस्पताल में भरती होने पर कोई भी केयर करनेवाला नहीं होता है, पर जब बच्चे का जन्म होता है, तो पैसे की मांग शुरू हो जाती है. उक्त बातें कंचन देवी के परिजन लाल मुनि देवी ने कहा कि सबसे पहले लेबर वार्ड में बच्चे के रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए 200 रुपये जबरदस्ती ले लिया गया.
