जिले के सभी धार्मिक स्थल आपस में जुड़ेंगे

पहल.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बक्सर को पर्यटन क्षेत्र में विकसित करने की हो रही तैयारी धार्मिक व पौराणिक दृष्टि से अतिमहत्वपूूर्ण मानेजानेवाली बक्सर की धरती को अब पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन जाग गया है और इसके लिए पर्यटन विभाग को एक पत्र भी लिखा है. पत्र के माध्यम से जिले […]

पहल.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बक्सर को पर्यटन क्षेत्र में विकसित करने की हो रही तैयारी
धार्मिक व पौराणिक दृष्टि से अतिमहत्वपूूर्ण मानेजानेवाली बक्सर की धरती को अब पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन जाग गया है और इसके लिए पर्यटन विभाग को एक पत्र भी लिखा है. पत्र के माध्यम से जिले के तमाम धार्मिक जगहों और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है़
क्षेत्रों को विकसित करने के लिए जिला प्रशासन ने पर्यटन विभाग को भेजा पत्र
स्थानीय लोगों से भी मांगी गयी अन्य जानकारियां
पर्यटकों से करोड़ों का राजस्व मिलेगा बक्सर जिले को
बक्सर : बक्सर जिला न सिर्फ रमणीक है, बल्कि पर्यटन की भी यहां ढेर सारी संभावनाएं हैं. यहां अगर पौराणिक स्थलों को विकसित किया जाये, तो निश्चित तौर पर एक बड़ा पर्यटन क्षेत्र बन सकता है और बड़ी मात्रा में विदेशी राजस्व की प्राप्ति इस जिले से हो सकती है. हालांकि इसकी कवायद पूर्व में भी जिला प्रशासन ने की थी, मगर सारी चीजें फाइलों में दब कर रह गयीं.
पर्यटन विभाग ने बक्सर जिले की उपेक्षा कर दी, जिसके कारण बक्सर जिले के पौराणिक क्षेत्र वर्षों से ज्यों-का-त्यों हैं और उन पर कोई विकास का काम नहीं हुआ. एक बार जब देश में रामायण सर्किट बनाने की बात उठी, तो फिर बक्सर जिले में भी इसकी कवायद शुरू हो गयी. जिलाधिकारी रमण कुमार ने एक बार फिर इसके लिए पहल की है और पर्यटन विभाग के सचिव को फरवरी, 2016 में ही एक प्रस्ताव बना कर भेजा है, जिसमें बक्सर जिले के सभी पर्यटन स्थल चिह्नित किये गये हैं. इन स्थलों पर कैसे कार्य होंगे और क्या-क्या कार्य कराये जायेंगे इसकी विवरणी भी भेजी गयी है.
अलग-अलग योजनाएं विभिन्न क्षेत्रों की बनायी गयीं हैं.
रामरेखा घाट-रामरेखा घाट पर भगवान राम और लक्ष्मण ने गंगा स्नान कर शिवलिंग की स्थापना की थी और यहां पूजन किया था. उनके चरण चिह्न आज भी मौजूद हैं. इस स्थल पर घाट का सौंदर्यीकरण, रोशनी और सफाई की व्यवस्था, जल निकासी की व्यवस्था, पर्यटकों के लिए कैफ्टीरिया का निर्माण, पर्यटन सुविधा का केंद्र का निर्माण, पर्यटकों के लिए विश्राम गृह तथा स्नान के बाद कपड़ा बदलने का कमरा, घाट के समीप लक्ष्मी-नारायण मंदिर और सिद्धनाथ घाट तक सफाई की व्यवस्था और रोशनी की व्यवस्था.
बक्सर शहर में अनेक स्थल रामायण सर्किट से जुड़ने योग्य हैं. महर्षि विश्वामित्र की तपो भूमि जहां भगवान राम और लक्ष्मण ने शिक्षा ग्रहण किया था. इसका जिक्र पौराणिक ग्रंथों में मिलते हैं.
इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए बक्सर स्टेशन पर महर्षि विश्वामित्र के नाम पर भव्य तोरणद्वार बनाने, मुख्य प्रवेश मार्ग गोलंबर पर महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा की लगाने, बक्सर शहर के मृत नहर एवं नहर के चारों तरफ राम-लक्ष्मण वाटिका का निर्माण करने, बक्सर स्टेशन पर पर्यटक सुविधा केंद्र बनाने, स्टेशन से रामरेखा घाट तक रोशनी की व्यवस्था करने, पर्यटकों की संख्या को देखते हुए पार्किंग की व्यवस्था करने, रामरेखा घाट के समीप जीर्ण हो गये लाइट एंड साउंड का पुनरुद्धार करने तथा लाइट एंड साउंड को लेजर शो से जोड़ने, शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर सौंदर्यीकरण करने, रामेश्वरनाथ मंदिर को आधुनिक एवं सुंदर बनाने, श्मशान घाट मोड़ से लक्ष्मी नारायण मंदिर तक सड़क और रोशनी तथा जल निकासी की व्यवस्था करने तथा बक्सर मुख्य सड़क पीपी रोड को गंगा घाट तक सभी संपर्क पथों को ठीक करने और पीसीसी करने तथा सार्वजनिक स्थलों पर शौचालय एवं स्नानागार का निर्माण करने.
वामनेश्वर मंदिर एवं जेल घाट-वामनेश्वर मंदिर एवं जेल घाट का पौराणिक महत्व है.भगवान विष्णु ने वामन का अवतार लेकर तीनों लोक यहीं से नापा था. यहां के मंदिर का सौंदर्यीकरण करने,पर्यटक सुविधा केंद्र बनाने, पार्क एवं सांस्कृतिक स्थल विकसित करने तथा पर्यटक आवासन स्थल बनाने और वामनेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया है.
पंचकोसी परिक्रमा स्थल-पंचकोसी परिक्रमा स्थल को विकसित करने का और रामायण सर्किट से जोड़ने का कार्यक्रम है,जिसमें सभी पांचों स्थलों पर बोर्ड लगाने, विकसित करने तथा पर्यटकों के लिए स्थल बनाने का काम किया जायेगा.
अहिरौली में गौतम ऋषि और अहिल्या जी का आश्रम, हनुमान जी का ननिहाल एवं पाषाण रूपी अहिल्या का श्रीराम द्वारा उद्धार. इस स्थल को विकसित करने के लिए यहां पर बने मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जायेगा.
नदांव नरहरि ऋषि का आश्रम है, जहां पर्यटकों की सुविधा के लिए और शौचालय,स्नानागार एवं कैफ्टीरिया का निर्माण कराया जायेगा.
भभुवर में भृगु ऋषि का आश्रम स्थित है, जिसमें तालाब का सौंदर्यीकरण तथा पार्क का निर्माण कराया जायेगा.
बड़का नुआंव में उन्नयन ऋषि का आश्रम है, जिसे विकसित किया जायेगा तथा पर्यटकों के आकर्षण को बढ़ाने के लिए उपाय किये जायेंगे.
चरित्रवन महर्षि विश्वामित्र की तपो भूमि है और यहीं भगवान ने शिक्षा ली थी. राक्षसी ताड़का का वध किया था और यहीं से भगवान राम सीता स्वयंवर के लिए जनकपुरी गये थे.
क्या कहते हैं डीएम
बक्सर में पर्यटकों को लुभाने के लिए बहुत कुछ है, मगर अब तक पर्यटक स्थलों का विकास नहीं हुआ है. रामायण सर्किट से जुड़ने के बाद बक्सर पर्यटन के मानचित्र पर आ जायेगा और देश-विदेश से पर्यटक बक्सर घूमने आयेंगे.उन्होंने बताया कि प्रारंभिक तौर पर इन स्थलों को चिह्नित किया गया है, मगर सर्किट से जुड़े अन्य पौराणिक स्थल पर जोड़े जाने की पूरी संभावना है और इसके लिए जिले के लोगों से जानकारियां मांगी गयी है.
रमण कुमार,जिलाधिकारी
ब्रह्मपुर : महाशिवरात्रि के अवसर पर ब्रह्मपुर में लगनेवाला फाल्गुन महाशिवरात्रि मेले की नीलामी की प्रक्रिया शुक्रवार को अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हो गयी. मेले की अंतिम बोली 25 लाख एक हजार 51 रुपये भोजपुर जिले के बिलौटी निवासी पंकज त्रिपाठी ने लगायी.
मेले की नीलामी को लेकर प्रखंड में काफी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसको लेकर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. गौरतलब हो कि प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर लगनेवाले इस मेले में बिहार के साथ-साथ उत्तरप्रदेश व झारखंड से काफी संख्या में पशुओं के साथ कारोबारी आते हैं तथा इस मेले में घरेलू सामान के साथ-साथ हर तहर का सामान बाहरी कारोबारियों के द्वारा लाकर बेचा जाता है़ महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां लाखों की संख्या में महिला व पुरुष भक्त आते हैं.
महाशिवरात्रि के दिन होगी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था
बाबा बरमेश्वरनाथ के दर्शन के लिए सात मार्च महाशिवरात्रि के दिन लाखों की संख्या में महिला व पुरुष भक्त जुटेंगे़ श्रद्धालुओं की भीड़ को भांपते हुए जिला प्रशासन व स्थानीय प्रशासन ने उस दिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी से ही चौकस हो गया है.मेले में बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा़ सभी वाहनों को चौरास्ता के पहले ही रोक दिया जायेगा़
सुबह चार बजे खुल जायेगा मंदिर
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर को सुबह चार बजे ही खोल दिया जायेगा़ वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जायेगी.

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