मेड़ विधि की खेती से उपज डेढ़ गुना

डुमरांव (बक्सर) : खेती की आधुनिक तकनीकी को किसानों तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं.वहीं, खेती करनेवाले किसान धान, गेंहू को छोड़ कर सब्जी की खेती नये प्रयोग से करते हुए आधुनिक तकनीकी का जन्म दे रहे हैं. सब्जी में गोभी, आलू, मिर्च, गाजर, मूली, टमाटर सहित अन्य सब्जियों की […]

डुमरांव (बक्सर) : खेती की आधुनिक तकनीकी को किसानों तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं.वहीं, खेती करनेवाले किसान धान, गेंहू को छोड़ कर सब्जी की खेती नये प्रयोग से करते हुए आधुनिक तकनीकी का जन्म दे रहे हैं. सब्जी में गोभी, आलू, मिर्च, गाजर, मूली, टमाटर सहित अन्य सब्जियों की खेती मेेड़ विधि से कर रहे है

धरहरा, पुराना भोजपुर, अमसारी, लेवाड़, सरौरा, कठार सहित अन्य दर्जनों गांवों के किसानाें का कहना है कि इस विधि से बुआई पर फसल में कीट रोग से नियंत्रण के साथ पानी के आधी बचत में खेती हो जा रही है. वहीं, खेताें की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है. मेंड़ विधि से खेती करने पर पौधों की जड़ों में पानी लगने का डर खत्म हो जाता है, ऐसे में जलजनित रोगों का प्रभाव फसल पर नहीं पड़ता़ मेड़ से पौधे की दूरी रहने से कीट नियंत्रण में असानी होती है़ मेड़ उच्चा होने से पौधों से पत्ति क्यारी में गिरती है़ जोताई के बाद पत्ति मिटी में दब कर खाद बन जाता है और उर्वरा क्षमता बढ़ाती है़ मेंड़ पर बुआई से पौधों की सख्या भी प्रभावित नहीं होती़

नियंत्रण के उपाय आसान
किसानों के विधि से सहमति जताते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार कहते हैं कि अमुमन पत्ति सिकुड़न रोग, जड़ों में गांठ रोग, फली छेंदक आदि रोग सब्जी की फसल में ज्यादा होता है़
मेंड़ पर लगाये पौधों में रोग लगने पर उनमें दवाओं के छिड़काव से लेकर नियंत्रण के उपाय आसान हो जाते हैं. इस विधि से बुआई पर लागत कम होने के साथ ही बेहतर उत्पादन होता है़ किसानों को इस विधि का प्रयोग करना चाहिए़
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी
कृषि पदाधिकारी मो़ शौकत अली ने कहा कि अधिक उपज का हवाला देकर सरकारी स्तर पर सब्जी खरीदने की मांग किसान कर रहे हैं.फिलहाल सरकारी स्तर पर सब्जी खरीदारी शून्य है़

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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