महिलाएं आठ लाख,लेडी डॉक्टर सिर्फ आठ

बदहाली.पीएचसी में महिला डॉक्टरों की कमी से पुरुष चिकित्सक कर रहे हैं इलाज जिले के सभी 11 प्रखंडों में 11 पीएचसी संचालित हैं. 2011 के जनगणना के अनुसार जिले के इन प्रखंडों में आठ लाख 18 हजार 375 महिलाएं निवास करती हैं. इसमें सिर्मफ नावानगर प्रखंड के पीएचसी में एक महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति है़ […]

बदहाली.पीएचसी में महिला डॉक्टरों की कमी से पुरुष चिकित्सक कर रहे हैं इलाज
जिले के सभी 11 प्रखंडों में 11 पीएचसी संचालित हैं. 2011 के जनगणना के अनुसार जिले के इन प्रखंडों में आठ लाख 18 हजार 375 महिलाएं निवास करती हैं. इसमें सिर्मफ नावानगर प्रखंड के पीएचसी में एक महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति है़ शेष 10 पीएचसी में एक भी महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं है, जिससे पीएचसी में आनेवाली महिला मरीजों का इलाज पुरुष चिकित्सक करते हैं तथा कुछ शर्म के कारण अपना इलाज कराये बगैर ही वापस घर लौट जाती हैं. वर्तमान में जिले में कुल आठ महिला चिकित्सकों की तैनाती है,जिसमें
बक्सर : बक्सर जिले में स्वास्थ्य सुविधा की हालत बहुत ही खराब है. दवा से लेकर चिकित्सक तक की कमी अस्पतालों में है. बक्सर व डुमरांव दो अनुमंडल हैं. जिनके अंतर्गत कुल 11 पीएचसी जिले में हैं. इनमें एक नावानगर प्रखंड के पीएचसी में महिला डाक्टर की तैनाती है.
बाकी के 10 पीएचसी में महिला मरीजों का इलाज पुरुष चिकित्सकों के भरोसे छोड़ दिया गया है.सदर अस्पताल को लेकर जिले में कुल आठ महिला डॉक्टर हैं. 50 हजार की आबादी पर कम-से-कम एक पीएचसी होना चाहिए, जिसमें एक महिला डाॅक्टर का भी होना जरूरी है, लेकिन नहीं हैं. आबादी के हिसाब से कम-से-कम जिले में तीन दर्जन महिला चिकित्सकों की जरूरत है.
जिले के तीन बड़े प्रखंडों, राजपुर, सिमरी व इटाढ़ी में महिला चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए रोटेशन पर महिला डॉक्टर की तैनाती का आश्वासन सिविल सर्जन ने जिलाधिकारी को दिया था, मगर एक माह बाद भी स्वास्थ्य विभाग यह पूरा नहीं कर सका. इलाज कराने के लिए सरकारी पीएचसी में जानेवाली महिलाओं को पुरुष डॉक्टरों से इलाज करवाना पड़ता है या फिर निराश होकर लौटना पड़ता है. 10 दिसंबर को एक सप्ताह के अंदर तीनों बड़े प्रखंडों में महिला डॉक्टरों के पदस्थापन का आश्वासन सीएस ने दिया था, मगर डेढ़ माह होने को है, पर डीएम को दिया आश्वासन भी धरातल पर नहीं उतर पाया है. इससे इन बड़े प्रखंडों के महिला मरीजों को अपनी बीमारी के इलाज के लिए अनुमंडल व जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ता है.गरीब महिला गांवों में मौजूद ग्रामीण झोलाछाप चिकित्सकों के चंगुल में फंस जाती हैं.
बड़ी आबादीवाला प्रखंड
सिमरी, राजपुर एवं ब्रह्मपुर तीनों प्रखंड में लाखों की आबादी बसती है. आधी आबादी की संख्या भी लाखों में है, पर इनके इलाज के लिए एक भी महिला चिकित्सक नहीं हैं. यह तीनों प्रखंड जिला मुख्यालय से सुदूरवर्ती व बॉर्डर इलाके में पड़ते हैं. पूरे जिले में ये तीनों प्रखंड आबादी में ज्यादा हैं, मगर फिर भी यहां महिला डॉक्टर का न होना चिंतनीय है.
करीब 50 महिला मरीज पहुंचती हैं रोज
तीनों प्रखंडों में पीएचसी तो है, पर महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं होने से महिला मरीजों को काफी परेशानी होती है. प्रतिदिन सौ के करीब महिला रोगी इलाज के लिए पएचसी में आती हैं. सिविल सर्जन ने बताया कि रोटेशन पर यहां प्रति सप्ताह एक दिन महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति का आश्वासन दिया गया था, मगर वह पूरा नहीं हो सका. अन्य छोटे प्रखंडों में फिलहाल महिला डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति करने की योजना नहीं है. क्योंकि महिला डॉक्टरों की ही कमी है.
प्रतिनियुक्ति से मिलेगा फायदा
इन तीनों प्रखंडों में महिला चिकित्सक के एक दिन की प्रतिनियुक्ति से भी बहुत लाभ होगा. इन प्रखंडों के साथ आसपास के छोटे प्रखंडों को भी लाभ मिलेगा.साथ ही महिलाओं को इलाज के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी.जो बीमार महिला जिला मुख्यालय में इलाज के लिए आती हैं, उन्हें प्रखंडों में ही इलाज मिल जायेगा, जिससे महिलाओं को बड़ी राहत होगी.
सदर अस्पताल में भी है कमी
सदर अस्पताल में भी महिला डॉक्टर की कमी है. यहां भी कम-से-कम सात दिनों के लिए सात महिला चिकित्सकों को होना चाहिए, मगर मात्र चार डाक्टरों के सहारे ही महिलाओं का इलाज चल रहा है. कमी के बावजूद चारों महिला डॉक्टर रोटेशन के आधार पर मरीजों का इलाज कर रही हैं.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ ब्रज कुमार सिंह ने कहा कि महिला चिकित्सकों की जिले में ही काफी कमी है. इसलिए पीएचसी में महिला चिकित्सकों की अभी तक प्रतिनियुक्ति नहीं हो पायी है.

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