एक परचाधारी राजनीतिक जीवन में आकर बन गये सिमरी प्रखंड प्रमुख
बक्सर : सिमरी प्रखंड के आशा पड़री में वर्ष, 1995-96 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने 17 गरीब भूमिहीन और दलित परिवारों को गृह स्थल योजना के अंतर्गत गैर मजरूआ आम भूमि का परचा दिया था, मगर आज तक इन गरीब भूमिहीनों को जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया. नतीजा आज भी इन परिवारों के लोग झोंपडि़यों में अथवा खुले आकाश के नीचे तिरपाल तान जीवन गुजारने को विवश हैं.
यही नहीं, परचाधारियों के जमीन के प्लॉट पर ही पंचायत भवन बन गया और कुछ जमीन पर स्वास्थ्य उपकेंद्र. जबकि लालू प्रसाद ने उस समय बक्सर समाहरणालय में आयोजित एक समारोह में गरीबों को परचा दिया था. सभी गरीबों को तीन-तीन डिसमिल जमीन दी गयी थी, मगर 20 साल बाद भी इन गरीबों को न जमीन मिली और न ही जमीन पर कब्जा. जबकि भूमिहीन दलित मुख्यमंत्री के जनता दरबार, जिलाधिकारी के जनता दरबार समेत अन्य अधिकारियों तक अपनी फरियाद लगा चुके हैं.
लालू प्रसाद ने दिया था परचा
वर्ष,1995-96 में आशा पड़री सिमरी के खाता नंबर 210 और प्लॉट नंबर 485 एवं 486 प्लॉट में से तीन-तीन डिसमिल जमीन लोगों को दी गयी, जिसमें प्लॉट नंबर 485 से शंकर भर, भागीरथ भर, महेश यादव, केदार गोड़, दिनेश कमकर, कमलेश्वर कमकर, बूढ़ा यादव, रामजी यादव, शिवजी यादव, सूर्यनाथ यादव, शिवशंकर तथा प्लॉट नंबर 486 से पहाड़ी गोड़ एवं सरल भर समेत चार अन्य गरीबों को परचा दिया गया. वहीं, 487 प्लॉट में शिवजी सिंह नामक लाभुकों को परचा दिया गया.
सिमरी प्रखंड प्रमुख शिवशंकर उन दिनों बदहाली में थे और प्राइवेट स्कूल में शिक्षण कार्य के जरिसे किसी तरह जीवन यापन करते थे. उन दिनों उन्हें भी परचा दिया गया. इस संबंध में परचाधारी फरियाद लगाते-लगाते थक चुके हैं और अंतिम लड़ाई लड़ना चाहते हैं.
