36 वर्ष बाद भी मुरार थाने को नहीं मिला अपना भवन

किराये के मकान में चलता है मुरार थाना चौगाईं : सदैव दूसरे को सहायता करने वाली मुरार पुलिस अपने आप को किराये की मकान में रह कर खुद असुरक्षित महसूस करती है़ं दो चार दस वर्ष ही नहीं पूरे 36 वर्षों के बाद भी विभाग मुरार थाने को अपना छत नहीं दे पाया, जो विभाग […]

किराये के मकान में चलता है मुरार थाना

चौगाईं : सदैव दूसरे को सहायता करने वाली मुरार पुलिस अपने आप को किराये की मकान में रह कर खुद असुरक्षित महसूस करती है़ं दो चार दस वर्ष ही नहीं पूरे 36 वर्षों के बाद भी विभाग मुरार थाने को अपना छत नहीं दे पाया, जो विभाग के कार्यों के ऊपर सवाल खड़ा करता है़
बता दें की अस्सी के दशक में पूरे इलाके में नक्सलियों का बोलबाला था़ यहां से 15 किलोमीटर दूर डुमरांव थाना स्थापित था. जहां से कुछ भी घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंचती थी़ उसी बीच 25 जनवरी 1980 की रात मुरार निवासी स्व. बख्सी प्रमोद कुमार के घर नक्सलियों ने धावा बोल दिया़ तथा उनके ट्रैक्टर ड्राइवर और नौकर की हत्या कर दी़
और बख्सी प्रमोद कुमार को नक्सलियों ने बंधक बना लिया़ तब उनकी पत्नी वीणा प्रसाद ने अपनी बंदूक उठा कर ताबड़तोड़ फायरिंग की और नक्सलियों को खदेड़ा़ जिसमें एसपी ने वीणा देवी को 200 की राशि से पुरस्कृत किया था़
इसके बाद क्राइम कंट्रोल करने के लिए 1981 में सूबे के मुख्य सचिव पीपी नैयर ने स्व़ प्रमोद कुमार के द्वार पर मुरार थाने का उद्घाटन किया था़ लेकिन इतने वर्ष बीतने के बाद भी मुरार थाने को अपना छत नसीब नहीं हो पाया. भवन के अभाव में कुछ पुलिस कर्मी सामने के उच्च विद्यालय में गुजारा करने को विवश हैं, जबकि थाना परिसर में हल्की सी बारिश होने पर पानी का जमाव शुरू हो जाता है़
कहते हैं थानाध्यक्ष
थानाध्यक्ष प्रभात कुमार की मानें, तो बरसात के दिनों में यहां पर जलजमाव के साथ-साथ कीडे़-मकौड़े का भी डर बना रहता है.

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