शहर की सफाई आज से ‘बंद’
पांच माह के 83 लाख रुपये बकाया के विरुद्ध मिले मात्र 20 लाख
दिसंबर, 2015 तक हिसाब कर बकाया देने पर ही एनजीओ करेगा काम
वैकल्पिक व्यवस्था के लिए नगर पर्षद ने कसी कमर
नगर पर्षद से सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित होने के बाद भी एनजीओ को नहीं मिला भुगतान
बक्सर : नगर पर्षद के 34 वार्डों की सफाई व्यवस्था पर एक बार फिर एक फरवरी से ग्रहण लगनेवाला है और हर मुहल्ला में कूड़ा उठानेवालों की सीटी भी एक फरवरी से सुनने को नहीं मिलेगी. क्योंकि सफाई व्यवस्था देखनेवाला शिवम जन स्वास्थ्य एवं सर्वांगीण विकास केंद्र ने पैसे नहीं मिलने के कारण फिर एक फरवरी से काम नहीं करने का नोटिस दे दिया है.
ज्ञात हो कि इसके पूर्व एनजीओ ने नगर पर्षद को एक जनवरी, 2016 से काम बंद करने का नोटिस दिया था, जिस पर नगर पर्षद ने चार जनवरी के बाद हिसाब करके भुगतान करने का आश्वासन दिया था, मगर पूरा जनवरी माह बीत गया और एनजीओ को एक पैसे का भुगतान नहीं हुआ, जिसके कारण विवश होकर एनजीओ को फिर एक फरवरी से काम न करने का चेतावनी पत्र नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी को दिया गया है.
सितंबर 2015 में मिला था टेंडर
नगर पर्षद ने शिवम जन स्वास्थ्य एवं सर्वांगीण विकास केंद्र नामक एनजीओ को एक सितंबर, 2015 से काम सौंपा था,क्योंकि उस वक्त शहर की सफाई व्यवस्था नगर पर्षद के सफाई कर्मियों द्वारा ठीक से नहीं की जा रही थी. नगर पर्षद ने तब यह शर्त रखा था कि हर दिन शहर की सफाई होगी.
नाले की सफाई होगी और डोर टू डोर प्रतिदिन कूड़े का उठाव होगा, जो कमोवेश शहर में सफाई व्यवस्था भी ठीक-ठाक है. फिर भी एनजीओ को दशहरा पर्व के पहले 10-10 लाख रुपये की राशि दो बार दी गयी और उसके बाद कोई भुगतान नहीं हुआ, जिसके कारण एनजीओ सफाई के काम में लगे करीब डेढ़ सौ से अधिक सफाई कर्मियों को नियमित भुगतान नहीं दे पा रहा है. जिसका असर सफाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.
एनजीओ को प्रति माह 16 लाख रुपये देना था
एनजीओ को सफाई के लिए प्रति माह 16 लाख 66 हजार रुपये का भुगतान करना है,मगर नगर पर्षद को एक सितंबर से एनजीओ की सफाई व्यवस्था के लिए अधिकृत किया था और पांच महीनों में मात्र 20 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया. जबकि एनजीओ का पांच महीने में 83 लाख रुपये का भुगतान होता है.
इसमें से नगर पर्षद को दी गयी सामग्री, ट्रैक्टर तथा सफाई कर्मी के भुगतान काटने के बाद भी 30 से 40 लाख रुपये का बकाया नगर पर्षद को करना है. एनजीओ ने अपने चेतावनी पत्र में कहा है कि दिसंबर 2015, तक का हिसाब भुगतान जब तक नहीं होगा, तब तक सफाई कर्मी काम नहीं करेंगे.
वार्ड पार्षदों ने एनजीओ के काम को सराहा
इस संबंध में नगर पर्षद के कई वार्ड पार्षदों से शहर की सफाई व्यवस्था पर जब बातचीत की गयी, तो वार्ड पार्षदों का कहना था कि सफाई व्यवस्था नगर पर्षद के सफाई कर्मियों की व्यवस्था से फिलहाल बेहतर है और एनजीओ के पैसे का भुगतान कर देना चाहिए.
वार्ड पार्षदों ने यह भी कहा कि एनजीओ के भुगतान के लिए बोर्ड ने पिछले दिनों सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित कर दिया था. फिर एनजीओ के भुगतान का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. कुछ पार्षदों ने दबी जुबान से यह भी कहा कि नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी भुगतान के एवज में कुछ चाहते हैं, जिसके कारण भुगतान रूका पड़ा है.
