बढ़ी कनकनी से ठिठुर गया शहर
26 जनवरी को भी न्यूनतम तापमान 8 डिग्री रहने की संभावना
बक्सर : बक्सर में ठंड और पछुआ हवा के बीच कनकनी बढ़ गयी है, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हाफ स्वेटर में रह रहे लोगों को फिर से ओवर कोट और जैकेट निकालना पड़ा है. पिछले 24 घंटे के अंदर सुबह पांच बजे से लेकर सुबह 8.00 बजे तक सर्वाधिक ठंड 9 डिग्री रही और कनकनी से लोग अपने-अपने घरों में दुबके रहे.
घरों में लोगों को कनकनी के कारण अलाव का सहारा लेना पड़ा. सुबह आठ बजे के बाद तापमान में सुधार आया और तापमान 11 डिग्री तक चला गया. घने कुहासे के बीच लोग अपने दिनचर्या के हिसाब से घरों से भी निकले.धुंध और कोहरे के कारण गाडि़यों को दिन में भी बत्तियां जला कर चलना पड़ा. मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 18 जनवरी को तापमान न्यूनतम चार डिग्री पर चला गया था और रिमझिम बरसात के बीच एकाएक ठंड लौट आयी थी.
इस बार का गणतंत्र दिवस भी ठंड के आगोश में होगा और तापमान आठ डिग्री सेल्सियस रहेगा, जिसके कारण ठंड के बीच गणतंत्र दिवस पर बच्चों के कार्यक्रम व परेड होंगे.
पांच दिनों के संभावित तापमान पर अगर नजर डाली जाये, तो 25 और 26 जनवरी को न्यूनतम तापमान घट कर आठ डिग्री हो जाने की संभावना है. साथ ही अधिकतम तापमान भी 22 डिग्री से ऊपर नहीं जा पायेगा. 21 जनवरी को जानकारी के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी छोर से सर्द हवाएं बह रही हैं, जिसकी गति सात किलोमीटर प्रति घंटे की है. सर्द हवाओं के बीच आद्रता भी बढ़ कर 88 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे लोगों का जीना हराम हो गया है.
सरकारी स्पष्ट आदेश के बावजूद पूरे जिले में अब तक अलाव की कोई व्यवस्था नहीं हो पायी है.फुटपाथ पर जीवन बसर करनेवाले लोगों को काफी मुश्किल हो रही है. सामाजिक संगठनों ने भी अब तक अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गयी है. हालांकि कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने फुटपाथी और गरीब बस्तियों में रहनेवाले परिवारों के बीच कंबल बांट कर राहत देने का काम किया है. बक्सर प्रखंड को मिले 40 कंबल में बीडीओ मनोज कुमार हालांकि देर रात घूम कर सड़कों पर ठंड से ठिठुर रहे गरीबों और दलितों को कंबल बांटने का काम किया है.
जिला प्रशासन द्वारा शीतलहरी के कारण 23 जनवरी तक बंद किये गये सभी स्कूलों के निर्देश के बाद स्कूली बच्चों को शीतलहर से फिलहाल बचाव हो गया है. हालांकि शीतलहर का प्रकोप 26 जनवरी के बाद ही सुधरेगा. इसलिए अभी से ही स्कूली बच्चे शीतलहर को लेकर सहमे हैं. ठंड के कारण गुरुवार को सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति कम रही और सड़कों पर भी कम लोग ही दिखे.
पछुआ हवा ने बढ़ाई कनकनी नहीं जला अलाव : चक्की. पिछले तीन दिनाें से मौसम में अचानक आये बदलाव से ठंड काफी बढ़ गयी है़ सबसे ज्यादा बुजुर्गों व बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है़ लोग घरों में दुबकने को विवश हो गये हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन द्वारा अबतक अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है, जिसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है. अलाव की प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था किये जाने से गरीब गुरबों को ठंड से बचाव में काफी राहत मिलती है़
