अनदेखी. खानाबदोश की स्थिति में चल रहे हैं कस्तूरबा मध्य विद्यालय व जवाहर प्राथमिक विद्यालय

50 वर्षों में भी नहीं मिला भवन बक्सर : शहर के कस्तूरबा मध्य विद्यालय व जवाहर प्राथमिक विद्यालय रामरेखा घाट जिले के स्थापना काल से ही खानाबदोश की तरह चल रहे हैं. दोनों ही विद्यालय निर्माण काल से जमीन नहीं मिलने से कई जगहों पर अस्थायी रूप से चलते हुए फिलहाल पर्यटन विभाग के लाइट […]

50 वर्षों में भी नहीं मिला भवन

बक्सर : शहर के कस्तूरबा मध्य विद्यालय व जवाहर प्राथमिक विद्यालय रामरेखा घाट जिले के स्थापना काल से ही खानाबदोश की तरह चल रहे हैं. दोनों ही विद्यालय निर्माण काल से जमीन नहीं मिलने से कई जगहों पर अस्थायी रूप से चलते हुए फिलहाल पर्यटन विभाग के लाइट एंड साउंड की खाली जमीन पर बहुत दिनों से चल रहे हैं.
वर्ष 2012 में इन विद्यालयों के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जमीन तो मुहैया करा दी गयी, लेकिन अब तक भवन निर्माण की राशि विद्यालय को प्राप्त नहीं हो सकी है, जिससे विद्यालय का पठन-पाठन पूरी तरह बाधित है.
विद्यालयों की स्थापना
कस्तूरबा मध्य विद्यालय रामरेखा घाट की स्थापना वर्ष 1968 ई. में एवं जवाहर प्राथमिक विद्यालय रामरेखा घाट की स्थापना 1966 ई. में शिक्षा विभाग द्वारा बगैर जमीन उपलब्ध कराये कर दी गयी थी. तब से अब तक ये विद्यालय कई जगहों से स्थानांतरित होते हुए रामरेखा घाट स्थित पर्यटन विभाग के जमीन पर अस्थायी रूप से संचालित हो रहे हैं.
छात्रों की संख्या
कस्तूरबा मध्य विद्यालय में कुल 463 बच्चे-बच्चियों का नामांकन है. जबकि जवाहर प्राथमिक विद्यालय में कुल 238 बच्चे-बच्चियों का नामांकन है.
शिक्षक थे मौजूद
कस्तूरबा मध्य विद्यालय में 10 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है, जिसमें एक विज्ञान शिक्षक विजय कुमार सिंह एवं एक अन्य शिक्षिका मंगलवार को विद्यालय में मौजूद थीं. जबकि अन्य सभी शिक्षक विद्यालय से नदारद थे. 463 बच्चों को पढ़ाने के लिए महज दो ही शिक्षक मौजूद थे.वहीं, जवाहर प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षक नियुक्त हैं, जिसमें दोनों ही शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के कार्य में लगे थे.
शेड में होती है पढ़ाई
दोनों विद्यालय रामरेखा घाट स्थित पर्यटन विभाग के लाइट एंड साउंड की भूमि पर शेड में चल रहे हैं. कस्तूरबा मध्य विद्यालय में 463 छात्र-छात्राएं पढ़ती हैं, जिसमें एक से चार कक्षा के बच्चे खुले आकाश के नीचे, तो चार-आठ तक के छात्र-छात्राएं एक ही शेड के नीचे पढ़ते हैं.
नहीं है शौचालय
कस्तूरबा मध्य विद्यालय में शौचालय नहीं होने से बड़े बच्चे-बच्चियों को काफी परेशानी होती है. जबकि जवाहर मध्य विद्यालय में शौचालय है पर, खुलता नहीं है.
पढ़ाई हो रही परेशानी
विद्यालय के पास अपना भवन नहीं होने से गरमी, बरसात एवं जाड़े में भी शेड व खुले आसमान के तले बैठ कर पढ़ना पड़ता है. बरसात के मौसम में अक्सर पढ़ाई बाधित होती है, जिससे बच्चों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है.
भूमि का हुआ आवंटन
कस्तूरबा मध्य विद्यालय को आठ डिसमिल एवं जवाहर मध्य विद्यालय को छह डिसमिल जमीन समीप में ही किले पर उपलब्ध करा दी गयी है. जवाहर मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापिका अंजू कुमारी ने बताया कि जमीन 2012, में ही मिल गयी है. उसका एनओसी भी मिला है, पर राशि के अभाव में भवन निर्माण नहीं हो सका है.
क्या कहते हैं अधिकारी
विद्यालय के लिए जो भूमि आवंटित है, वह अभी अतिक्रमित है. अतिक्रमणमुक्त करने के लिए बक्सर अंचलाधिकारी को लिखा गया है. अतिक्रमणमुक्त होते ही भवन निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा.
सइद अंसारी, सर्वशिक्षा अभियान के डीपीओ

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