मेंटेनेंस के नाम पर एक दिन में छह छह घंटे गुल रह रही जिले में बिजली

एक दिन के शट डाउन से ढाई लाख यूनिट की बचत बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नाम पर बिजली कंपनी रोजाना जिले में छह घंटे बिजली गुल रख रही है. यह सिलसिला 20 मार्च तक चलेगा. इस एक दिन के शट डाउन से लगभग ढाई लाख यूनिट बिजली की बचत व औसतन चार रुपये प्रति […]

एक दिन के शट डाउन से ढाई लाख यूनिट की बचत
बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नाम पर बिजली कंपनी रोजाना जिले में छह घंटे बिजली गुल रख रही है. यह सिलसिला 20 मार्च तक चलेगा. इस एक दिन के शट डाउन से लगभग ढाई लाख यूनिट बिजली की बचत व औसतन चार रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से रोजाना लगभग 10 लाख रुपये की बचत कंपनी को हो रहा है.
बक्सर : मेंटेनेंस को लेकर बिजली कंपनी जिले के तमाम फीडरों को अलग-अलग समय पर 10 मार्च से शट डाउन रख रही है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी ङोलनी पड़ रही है. बिजली के सहारे व्यवसाय करनेवाले लोगों ने बताया कि लगभग छह-छह घंटे लगातार शट डाउन होने से जेनेरेटर का उपयोग कर व्यवसाय करना पड़ रहा है, जो काफी महंगा पड़ जा रहा है. बता दें कि 10 मार्च से लेकर 20 मार्च तक लगातार जिले के विभिन्न प्रखंडों के इलाकों में अलग-अलग समय पर शट डाउन रह रहा है. विभिन्न शट डाउन के समय को जोडा जाये, तो कुल 263 घंटे होता है.
यानी शट डाउन से 11 दिन बिजली आपूर्ति ठप रहेगी. गरमी के मौसम में लोगों को बिजली की किल्लत न हो इसके लिए कंपनी मेंटेनेंस के नाम पर शट डाउन कर रही है. हालांकि जानकारों की मानें, तो 263 घंटे के शट डाउन से उपभोक्ताओं को बिजली कटौती के बाद भी इसके लिए भुगतान करना पड़ेगा. क्योंकि कंपनी के नियम के अनुसार 40 यूनिट तक की बिजली बिल तय है. शहरी क्षेत्र में रोजाना 18-20 मेगावाट बिजली की खपत है. शट डाउन में शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को कुल 43 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 80 घंटे बिजली कट सहना पड़ेगा.
कंपनी को कोई नुकसान नहीं : कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि बिजली कटौती से कंपनी को कोई नुकसान नहीं है.
एक दिन में 10 लाख रुपये की बचत : विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक
विभाग से मिली जानकारी के आधार पर चरित्रवन व औद्योगिक सब पावर स्टेशन से रोजाना औसतन ढाई लाख यूनिट की खपत है. औसतन चार रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से रोजाना लगभग 10 लाख रुपये कंपनी का खर्च होता है. ऐसे में शट डाउन के नाम पर 11 दिन बिजली ठप रखने से लगभग 110 लाख रुपये का कंपनी को बचत होगा. इससे स्पष्ट है कि कहीं-न-कहीं विभाग के लिए यह फायदेमंद साबित होगा, लेकिन बिजली कटौती से जिले के उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ना निश्चित है.
पूर्व संसाधन प्रबंध नहीं होने से लगता है अधिक समय : बिजली संघ के अध्यक्ष रामभूवन राय ने बताया कि मेंटेनेंस के कार्य में यदि थोड़ी रणनीति अपनायी जाये, तो शट डाउन का दायरा कम किया जाता है. कार्य स्थल पर पहले से ही संसाधन उपलब्ध हो, तो मेंटेनेंस कार्य कम समय में खत्म किया जा सकता है.
क्या कहते हैं व्यवसायी
ठठेरी बाजार स्थित लेथ मशीन दुकानदार गुड्डू शर्मा ने बताया कि शट डाउन के कारण व्यवसाय में अतिरिक्त खर्च का वहन करना पड़ रहा है. दुकानदार ने बताया कि यदि एक दिन शट डाउन किया जाता है, तो उस दिन कम-से-कम 25 सौ रुपये जेनेरेटर में खर्च करना पड़ता है. अक्सर शट डाउन दुकानदारी के वक्त होता है, जिससे दुकानदारी पर बुरा असर पड़ रहा है. इसी समस्या के बारे में तरुण हार्डवेयर व शंकर कुमार, सुनील कुमार ने बताया कि टाउन का शट डाउन 10 से करीब 5 बजे शाम तक रहा, जो दुकानदारी का समय होता है.
क्या कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी
कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि गरमी के मौसम में जिले के उपभोक्ताओं को बिजली किल्लत न ङोलनी पड़े. इसके लिए पूर्व ही मेंटेनेंस कार्य को पूरा किया जा रहा है.
महत्वपूर्ण जानकारी
पूरे शट डाउन में बक्सर शहरी क्षेत्र में 43 घंटे गुल रहेगी बिजली
80 घंटे ग्रामीण क्षेत्र में
शहरी क्षेत्र में रोजाना 18-20 मेगावाट की है खपत
रोजाना ढाई लाख यूनिट की है खपत
शहरी क्षेत्र में लगभग 19 हजार हैं उपभोक्ता
जिले में 1374 ट्रांसफॉर्मर हैं
269 ट्रांसफॉर्मर हैं नगर में हैं

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