2030 तक नालंदा बनेगा कालाजारमुक्त जिला, प्रभावित चार प्रखंडों के चार गांवों में चल रहा दवा छिड़काव

नालंदा को 2030 तक कालाजारमुक्त जिला बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर सकारात्मक एवं गुणात्मक कार्य कर रहा है़

बिहारशरीफ. नालंदा को 2030 तक कालाजारमुक्त जिला बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर सकारात्मक एवं गुणात्मक कार्य कर रहा है़ फिलहाल कालाजार प्रभावित जिले के चार प्रखंडों के चार गांवों में कालाजार रोग को फैलाने वाले बालू मक्खी एवं इसके लार्वा को समाप्त करने के लिए एसपी पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है. जिला वेक्टर वॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ़ राम मोहन सहाय ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए अभियान चलाया जा रहा है और इस दौरान कालाजार के संदिग्ध मरीजों की पहचान से लेकर ऐसे मरीजों के घरों में प्राथमिकता के आधार पर एसपी दवा का सघन रूप से छिड़काव किया जा रहा है. अभियान के पहले चरण में चार प्रखंडों के चार गांवों को चयनित किया गया है जहां कर्मी घर घर जाकर दवा का छिड़काव कर रहे हैं. इन चययनित गांवों में नूरसराय प्रखंड के कुंदी, हिलसा के हरवंशपुर, इस्लामपुर के मलबीघा एवं अस्थावां प्रखंड के नेरूत गांव शामिल है़ उन्होंने बताया कि अभियान के दूसरे चरण में 1,224 घरों में दवा का छिड़काव किया जायेगा. इसके लिये सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही है. अभियान की सफलता के कारण इस वर्ष अब तक कालाजार का एक मामला ही सामने आया है. 15 दिन से अधिक बुखार रहने पर चिकित्सक से करें संपर्क : जिला वेक्टर वॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ़ सहाय कालाजार मुख्य रूप से बालू मक्खी के काटने से फैलता है. इससे बचाव के लिए एसपी दवा का छिड़काव ही प्रभावी उपाय है. घर के सभी हिस्सों जैसे शयनकक्ष, पूजा घर, बरामदा, रसोई, गौशाला एवं शौचालय की दीवारों पर 6 फीट तक छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है. दवा छिड़काव के दौरान 15 दिन से अधिक बुखार वाले मरीजों की पहचान की जायेगी, क्योंकि वे कालाजार के संदिग्ध मरीज हो सकते हैं. लेकिन स्क्रीनिंग व जांच के उपरांत ही कंफर्म मरीज का पता चल पाता है.

कालाजार रोग से बचाव के यह उपाय

बालू मक्खी के काटने से बचें

त्वचा को ढकने वाले कपड़े पहनें

कीट प्रतिरोधी का उपयोग करें

मच्छरदानी का उपयोग करें

घर के आसपास की सफाई रखें

दीवारों में दरारों को बंद करें

कीटनाशकों का छिड़कांव कराएं

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Published by: Amlesh prasad

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