नालंदा में एक साथ सूख गईं 5 बड़ी नदियां, धूल उड़ा रहे तालाब; खरीफ फसल और मवेशियों पर मंडराया संकट

Nalanda Water Crisis News: नालंदा जिले के बिन्द प्रखंड में पांच प्रमुख नदियां और पारंपरिक तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं. भूगर्भीय जलस्तर लगातार नीचे गिरने से धान का बिछड़ा तैयार करने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं. ग्रामीणों ने भू-माफियाओं पर लगाया पइन और पोखरों के अतिक्रमण का आरोप. पढ़ें रिपोर्ट.

Nalanda Water Crisis News (अमर वर्मा): नालंदा जिले के बिन्द प्रखंड क्षेत्र से भीषण गर्मी और जल संकट के बीच इंसानियत और किसानी को झकझोर देने वाली एक बेहद भयावह ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है. प्रकृति की मार और इंसानी लालच के कारण बिन्द प्रखंड क्षेत्र में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है. कभी पांच प्रमुख नदियों के जाल से घिरा रहने वाला यह समृद्ध इलाका आज पानी की एक-एक बूंद के लिए बुरी तरह तरस रहा है. क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली तमाम नदियां और पारंपरिक जलस्रोत पूरी तरह सूखकर मैदान में तब्दील हो चुके हैं, जिससे स्थानीय किसानों और पशुपालकों के सामने जीवन और आजीविका का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

पाताल में चला गया भूगर्भीय जलस्तर, धान की नर्सरी तैयार करने में छूट रहे किसानों के पसीने

स्थानीय कृषि विशेषज्ञों और किसानों से मिली जानकारी के अनुसार, नदियों के सूखने का सीधा और सबसे घातक असर क्षेत्र के भूगर्भीय जलस्तर पर पड़ा है. बिन्द क्षेत्र की आन-बान-शान कही जाने वाली जीराईन, कुंभरी, सोईवा, गोइठवा और नोनिया नदियां इस चिलचिलाती धूप में पूरी तरह सूख चुकी हैं और अब उनके घाटों पर सिर्फ धूल उड़ रही है. वर्तमान समय धान का बिछड़ा (नर्सरी) तैयार करने और उसकी सिंचाई करने का है. लेकिन बोरिंग और चापाकालों द्वारा पानी छोड़ देने के कारण खेतों तक पानी पहुंचाना नामुमकिन साबित हो रहा है. किसानों को डर है कि यदि अगले कुछ दिनों में जलस्तर में सुधार नहीं हुआ या मानसून ने दगा दिया, तो खरीफ फसल की बुआई पूरी तरह ठप हो जाएगी.

बेजुबान पशु-पक्षियों के सामने जीवन रक्षा की आफत, ग्रामीणों ने सरकार की नीतियों को कोसा

इस भीषण सूखे का सबसे दर्दनाक असर बेजुबान मवेशियों और पक्षियों पर देखने को मिल रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों के तमाम पारंपरिक ताल-तलैया, पोखर और गड्ढे सूख जाने से मवेशियों के लिए पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है. स्थानीय ग्रामीण नरेश राउत, रामप्रित राउत, बसंत राउत, बिजय राउत, सोनी कुमार, सुबोध प्रसाद और मिथलेश कुमार ने भर्राए गले से अपना दर्द बयां किया. उन्होंने कहा कि जो नदियां और पोखर कभी हमारे और हमारे मवेशियों के लिए जीवन का आधार हुआ करती थीं, वे आज रेगिस्तान बन चुकी हैं. सरकार हर साल कागजों पर पशुओं की गणना तो बड़े उत्साह से कराती है, लेकिन इन बेजुबान जानवरों को मौत के मुंह से बचाने या उनके लिए सार्वजनिक प्याऊ और पानी का प्रबंध करने के लिए धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती.

भू-माफियाओं के लालच ने ली तालाबों की बलि, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लगाई गुहार

ग्रामीणों ने क्षेत्र के जलस्रोतों की इस दुर्दशा के पीछे सिर्फ मौसम को नहीं, बल्कि इंसानी लालच और भू-माफियाओं के सिंडिकेट को जिम्मेदार ठहराया है. आरोप है कि बिन्द प्रखंड के अधिकांश पारंपरिक तालाबों, सरकारी पोखरों और खेतों को पानी पहुंचाने वाली पइनों पर स्थानीय दबंगों और भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है. पानी के प्राकृतिक रास्तों को रोककर और पुराने जलाशयों को मिट्टी से पाटकर धड़ल्ले से पक्के मकान और दुकानें खड़ी की जा रही हैं, जिससे जल संचयन की पूरी प्राकृतिक व्यवस्था ही ध्वस्त हो गई है.

बिन्द प्रखंड के पीड़ित किसानों और पशुपालकों ने नालंदा जिला प्रशासन और बिहार सरकार से इस गंभीर स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेने की गुहार लगाई है. ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि क्षेत्र के सभी तालाबों, पइनों और नदी घाटों को तत्काल प्रभाव से भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाए. इसके साथ ही गिरते जलस्तर को रोकने के लिए वाटर रिचार्जिंग और जल संचयन के आधुनिक प्रोजेक्ट्स पर तुरंत काम शुरू किया जाए, ताकि बिन्द की खेती और बेजुबान जानवरों की जान बचाई जा सके.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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