Nalanda University Mongolia MoU News (रामविलास): नालंदा जिले में स्थित अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय ने वैश्विक पटल पर भारत का गौरव बढ़ाते हुए एक नया इतिहास रच दिया है. भारत और मंगोलिया के बीच सदियों पुराने बौद्ध, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई डिजिटल ऊर्जा प्रदान करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय ने मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में दो बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. 8 और 9 जून को संपन्न हुई यह अंतरराष्ट्रीय साझेदारी शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और ज्ञान-साझाकरण के क्षेत्र में दोनों देशों के राजनयिक व शैक्षणिक सहयोग को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित होगी.
ऐतिहासिक गंदन मठ के साथ पहला महा-समझौता, लद्दाख के एलजी भी रहे गवाह
इस वैश्विक अभियान के पहले चरण में 8 जून को उलानबटार स्थित दुनिया के ऐतिहासिक गंदनतेगचिनलेन मठ (गंदन मठ) में नालंदा विश्वविद्यालय और गंदन मठ के बीच पहला एमओयू संपन्न हुआ. समझौता पत्र पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी तथा गंदन मठ के प्रमुख व सर्वोच्च धर्माध्यक्ष भिक्षु गेशे ल्हारम्पा जावज़ंदोरज दुलमरागचा (खाम्बा नोमुन खान) ने हस्ताक्षर किए. इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोटसुरवे, अरखंगाई प्रांत के गवर्नर बी. त्सेरेननादमिद और भारत सरकार के कई वरिष्ठ राजनयिक विशेष रूप से मौजूद रहे.
इस समझौते के तहत दोनों देश मिलकर संयुक्त अनुसंधान, दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और संयुक्त प्रकाशन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देंगे. इससे प्राचीन नालंदा की समृद्ध ज्ञान परंपरा को विश्व स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी.
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मंगोलिया के साथ जुड़ा दूसरा ज्ञान सेतु, इन विषयों पर होगा संयुक्त शोध
ठीक इसके अगले दिन 9 जून को नालंदा विश्वविद्यालय ने मंगोलिया के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान ‘नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मंगोलिया’ (NUM) के साथ अपने दूसरे महा-समझौते पर हस्ताक्षर कर ज्ञान का एक और नया सेतु तैयार किया. इस समझौते पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी और एनयूएम की उपाध्यक्ष (अनुसंधान एवं सहयोग) प्रो. बातारचुलून त्सेरमा ने हस्ताक्षर किए. यह विशेष साझेदारी धर्म अध्ययन, बौद्ध दर्शन, कला, इतिहास, पारिस्थितिकी (Ecology), संस्कृत और तिब्बती भाषा के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापार व आर्थिक इतिहास जैसे विविध और गंभीर विषयों पर केंद्रित होगी.
वैश्विक शिक्षा और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ेगा नालंदा, छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि इन दोनों अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का सबसे सीधा और बड़ा लाभ भारत और मंगोलिया के छात्रों व शोधार्थियों (Researchers) को मिलेगा. इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान (Faculty Exchange Program) और संयुक्त शोध परियोजनाएं बड़े स्तर पर संचालित की जाएंगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ज्ञान सेतु वैश्विक शिक्षा और अनुसंधान के नए अवसरों के द्वार तो खोलेगा ही, साथ ही प्राचीन नालंदा की उस महान विचार परंपरा को भी दुनिया में पुनर्जीवित करेगा जो ज्ञान, वैश्विक शांति, भाईचारे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मूल्यों पर टिकी हुई है. इस समझौते के बाद राजगीर स्थित नालंदा यूनिवर्सिटी कैंपस में भी उत्सव का माहौल है.
