Biharsharif Smart Mandi News (कंचन कुमार): नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन की बर्बादी का एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है. बिहारशरीफ स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अत्यंत महत्वाकांक्षी रामचंद्रपुर बाजार समिति के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण पर कुल 14.53 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए गए. करीब 39 एकड़ के इस विशाल परिसर का निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2024 को ही पूरा कर लिया गया था और 20 फरवरी 2025 को खुद सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिबन काटकर इसका उद्घाटन भी किया था. लेकिन विडंबना देखिए कि उद्घाटन के डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी यह हाई-टेक मंडी आम किसानों और व्यापारियों के लिए पूरी तरह बंद पड़ी है और सिर्फ फाइलों की धूल फाँक रही है.
बिना इस्तेमाल खत्म हो रही है एसी और लिफ्ट की वारंटी, पुल निर्माण निगम ने दी आखिरी चेतावनी
बाजार समिति के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बंद पड़े परिसर के भीतर अब एक बड़ा आर्थिक नुकसान होने की कगार पर है. इस आधुनिक मंडी परिसर में किसानों की सहूलियत के लिए कीमती लिफ्ट, सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनर (AC), बड़ा सोलर पावर सिस्टम और ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं. निर्माण एजेंसी यानी पुल निर्माण निगम ने अब स्मार्ट सिटी लिमिटेड के आला अधिकारियों को एक कड़ा पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि बिना उपयोग के बंद पड़े रहने के कारण इन सभी महंगे उपकरणों की वारंटी और गारंटी अवधि अब खत्म होने की कगार पर पहुंच चुकी है. अगर समय रहते इन्हें चालू नहीं किया गया, तो करोड़ों की सरकारी परिसंपत्तियां बिना एक दिन चले ही पूरी तरह कबाड़ और बेकार हो जाएंगी.
असामाजिक तत्वों का बढ़ा जमावड़ा, ताले तोड़कर लाखों के पार्ट्स चुरा रहे हैं चोर
स्मार्ट मंडी के बंद रहने और वहां से सुरक्षा कर्मियों की संख्या अचानक घटा दिए जाने के कारण इस करोड़ों के सरकारी परिसर पर अब स्थानीय चोरों और नशेड़ियों (असामाजिक तत्वों) का कब्जा होने लगा है. निर्माण एजेंसी ने नगर निगम को रिपोर्ट सौंपी है कि पिछले कुछ महीनों में बंद पड़े भवनों के ताले तोड़कर कई कीमती मेडिकल व तकनीकी उपकरणों, बिजली के तारों और खिड़की-दरवाजों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है और कई सामग्रियां चोरी हो चुकी हैं.
बिजली कनेक्शन गायब और बाउंड्री में दरारें, संयुक्त जांच टीम के निरीक्षण में खुली पोल
जनवरी 2026 में जब विभिन्न तकनीकी विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त हाई-लेवल जांच टीम ने इस बाजार समिति परिसर का औचक निरीक्षण किया, तो वहां कई चौंकाने वाली तकनीकी और संरचनात्मक कमियां (लूपहोल्स) लाइव पकड़ी गईं. जांच रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी लापरवाही यह मिली कि इतनी बड़ी मंडी के मुख्य किसान भवन और फिश मार्केट में आज तक थ्री-फेज एचटी (High Tension) लाइन का बिजली कनेक्शन ही नहीं लिया गया है. बिजली न होने के कारण ही यहां स्थापित सारी मशीनें, लिफ्ट और एसी शोपीस बने हुए हैं. इसके अलावा वर्कर्स रेस्ट शेड और वेंडिंग प्लेटफॉर्म की नई टाइल्स अभी से ही टूटी हुई मिलीं, मुख्य गेट पर सीसीटीवी कैमरे गायब थे, वर्कर्स कैंटीन की वायरिंग अधूरी पाई गई और परिसर की मुख्य बाउंड्री वॉल में अभी से ही लंबी-लंबी दरारें उभर आई हैं जो निर्माण की खराब गुणवत्ता को साफ बयां कर रही हैं.
पटना हाईकोर्ट का स्टे और हैंडओवर का कागजी पेच, नगर आयुक्त कुमार निशांत ने दी सफाई
परियोजना के कुछ हिस्सों के अधूरे रह जाने के पीछे एक कानूनी पेच भी सामने आया है. स्थानीय दुकानदारों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने यथास्थिति (Stay Order) बनाए रखने का आदेश जारी कर दिया था. इस अदालती आदेश के कारण मंडी का एक मुख्य वेंडिंग प्लेटफॉर्म, 114 दुकानें तथा कुछ आंतरिक सड़कों और नालों का निर्माण कार्य बीच में ही अटक गया. वर्तमान में एक बड़े वेंडिंग प्लेटफॉर्म का निर्माण केवल 60 प्रतिशत पर ही रुका हुआ है.
इस पूरे महा-विवाद और करोड़ों की बर्बादी पर बिहारशरीफ के नगर आयुक्त कुमार निशांत विवेक ने अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड बताया कि बाजार समिति के मुख्य भवनों के निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य कागजों पर पूरा हो चुका है. यह पूरी परियोजना वर्तमान में केवल पुल निर्माण निगम से नगर निगम को हैंडओवर (हस्तांतरण) किए जाने की शासकीय प्रक्रिया में अटकी हुई है और इसके लिए विभाग के अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है. जैसे ही मुख्यालय से मार्गदर्शन और हरी झंडी मिलेगी, परिसंपत्तियों का हस्तांतरण कर मंडी का संचालन लाइव शुरू करा दिया जाएगा. बहरहाल, जब तक अफसरों की यह कागजी फाइलें टेबल-दर-टेबल घूम रही हैं, तब तक नालंदा के हजारों गरीब किसान और आढ़ती इस आधुनिक मंडी की सुविधाओं से पूरी तरह वंचित होकर सड़कों पर व्यापार करने को मजबूर हैं.
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