मखाना से बदलेगी गांवों की तस्वीर, 69 हजार रोजगार के मौके, चमकेगी महिलाओं की किस्मत

Bihar News: बिहार में मखाना सेक्टर को रोजगार का नया इंजन बनाने की योजना तैयार की गई है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में मखाना उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के जरिये बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है.

Bihar News: बिहार का मशहूर मखाना अब सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि रोजगार का बड़ा जरिया भी बनने जा रहा है. राज्य सरकार ने मखाना उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा देकर हजारों लोगों को रोजगार देने की तैयारी शुरू कर दी है. बिहार की पहचान अब दुनिया भर में मखाने के ‘ग्लोबल हब’ के रूप में स्थापित हो रही है.

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक ऐसा खाका तैयार किया है, जो न केवल मखाना उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदल देगा.

मखाना सेक्टर से खुलेगा रोजगार का नया रास्ता

बिहार देश में मखाना उत्पादन के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है और अब इसी क्षेत्र को संगठित तरीके से विकसित करने की तैयारी की जा रही है. सरकार ने रोजगार सृजन का आकलन फुल टाइम इम्प्लॉयमेंट के आधार पर किया है, जिसमें एक व्यक्ति के साल में 260 दिन काम करने को मानक माना गया है.

इस योजना के तहत मखाना की खेती से लेकर उसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक पूरी वैल्यू चेन में रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे. इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलने की उम्मीद है.

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर

मखाना सेक्टर के इस विस्तार में महिलाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है. योजना के अनुसार कुल रोजगार में करीब 32 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की होगी.

लगभग 22 हजार से अधिक महिलाओं को साल में एक नौकरीपेशा व्यक्ति के बराबर रोजगार मिलने की संभावना है. इससे गांवों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और उनकी आय में भी सुधार हो सकता है.

47 हजार हेक्टेयर में होगी मखाना की खेती

सरकार ने वर्ष 2026-27 में 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती का लक्ष्य रखा है. प्रति हेक्टेयर लगभग 2002 किलोग्राम उत्पादन का अनुमान है.

इसके आधार पर कुल 94 हजार 75 टन मखाना बीज उत्पादन और करीब 43,275 मीट्रिक टन पॉप उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. साथ ही 12 हजार टन मखाना के निर्यात की भी योजना बनाई गई है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को फायदा मिल सकता है.

2030 तक एक लाख से ज्यादा रोजगार का लक्ष्य

वर्ष 2030-31 तक यह संख्या बढ़कर करीब 1.20 लाख लोगों तक पहुंचाने की योजना है. हर साल इनमें लगभग 32 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की ही रहेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत मिलने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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