Bihar EOU Action: बिहार में NEET UG और Re-NEET UG परीक्षा में गड़बड़ी की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने बड़ी कार्रवाई की है. EOU की स्पेशल टीम 3 मई 2026 को हुई NEET UG एग्जाम और 21 जून 2026 की Re-NEET एग्जाम से जुड़े मामलों की जांच कर रही है. जांच के दौरान 11 अगस्त को EOU ने गिरियक मामले के मुख्य आरोपी उज्जवल राज को गिरफ्तार किया. इसके अगले दिन 12 अगस्त को Re-NEET से जुड़े तीनों मामलों के मुख्य सरगना बताए जा रहे रविशंकर उर्फ सम्राट को भी पकड़ा गया.
आर्यभट्ट यूनिवर्सिटी के बाहर से पकड़ा गया उज्जवल राज
EOU के मुताबिक उज्जवल राज को पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया गया. उज्जवल राज के पिता का नाम अशोक कुंवर है और वह पूर्वी चंपारण के केसरिया इलाके के दिलवरपुर का रहने वाला है.
उज्जवल राज पावापुरी मेडिकल कॉलेज में MBBS अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है. उसके पास से एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी मिली है, जिसका नंबर BR01HU2630 है. इसके अलावा फर्जी स्कॉलर बैठाने से जुटाए गए 2.95 लाख रुपये कैश बरामद किए गए हैं.
Re-NEET केस का मुख्य सरगना भी गिरफ्तार
12 अगस्त को EOU ने डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को भी गिरफ्तार कर लिया. EOU के अनुसार वह Re-NEET परीक्षा से जुड़े तीनों मामलों का मुख्य सरगना है. रविशंकर के पिता का नाम अरविंद कुमार है और वह पटना के शाहजहांपुर इलाके के मकसूदपुर का रहने वाला है. वह भी पावापुरी मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई कर रहा है.
पहले रेलवे भर्ती परीक्षा में भी जेल जा चुका है रविशंकर
जांच एजेंसी के अनुसार रविशंकर पहले रेलवे ग्रुप-D भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में जेल जा चुका है. उसकी पत्नी मधु प्रिया पर भी Re-NEET परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा पास कराने का आरोप है.
गर्भवती होने के कारण अदालत ने फिलहाल उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है. EOU के मुताबिक रविशंकर ने इसी राहत का फायदा उठाते हुए 29 जुलाई 2026 को हवलदार अनुदेशक परीक्षा में भी गड़बड़ी कराई. इस काम में बायोमेट्रिक वेंडरों की मदद लेने का आरोप है.
भाई के फ्लैट और किराए के घर पर छापेमारी
रविशंकर की गिरफ्तारी के बाद EOU ने उसकी निशानदेही पर पटना के रामकृष्ण नगर में उसके भाई के फ्लैट और किराए के मकान पर छापेमारी की. इस कार्रवाई में MBBS परीक्षा की खाली बुकलेट मिलीं. इसके अलावा NEET, BPSSC और CBSE समेत कई परीक्षाओं के एडमिट कार्ड भी बरामद किए गए.
25 ब्लैंक चेक और 2 लाख कैश मिला
छापेमारी के दौरान जांच टीम को अलग-अलग बैंकों के 25 खाली लेकिन साइन किए हुए चेक मिले. इनमें SBI, PNB, HDFC और Bank of Baroda के चेक शामिल हैं. इसके साथ ही 2 लाख रुपये कैश भी बरामद हुआ. जांच टीम को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT में गड़बड़ी से जुड़े ऑनलाइन एग्जाम सेंटर के एग्रीमेंट पेपर भी मिले.
फर्जी जाति और आय प्रमाण पत्र भी बरामद
EOU को बड़ी संख्या में फर्जी जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी मिले हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक इन दस्तावेजों का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए किया जाता था. EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए कितने लोगों को फायदा पहुंचाया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं.
रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार की भी गिरफ्तारी
जांच के दौरान रविशंकर के बड़े भाई अश्विनी कुमार पर भी कार्रवाई हुई है. EOU ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. उस पर रविशंकर को मदद देने और उसे संरक्षण देने का आरोप है. मामले में अब जांच टीम दूसरे लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है.
12 से 30 लाख रुपये में होती थी पूरी सेटिंग
EOU के अनुसार यह गिरोह परीक्षा का फॉर्म भरने के समय ही असली अभ्यर्थी और उसकी जगह परीक्षा देने वाले स्कॉलर के बीच सेटिंग कर लेता था. इसके बाद बायोमेट्रिक जांच को चकमा देने की तैयारी की जाती थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि आधार एजेंटों और CSC संचालकों की मदद से फोटो और फिंगरप्रिंट में बदलाव कराया जाता था. इस पूरे काम के लिए एक अभ्यर्थी से करीब 12 लाख से 30 लाख रुपये तक लिए जाते थे.
परीक्षा केंद्र पर पहचान बदलने का खेल
जांच के मुताबिक बायोमेट्रिक में फोटो और फिंगरप्रिंट बदलने का मकसद यह था कि परीक्षा केंद्र पर स्कॉलर की पहचान जांच में पकड़ी न जाए. यानी परीक्षा देने वाला व्यक्ति असली अभ्यर्थी न होकर कोई दूसरा होता था, लेकिन बदले हुए बायोमेट्रिक की वजह से जांच प्रक्रिया में वह उसी अभ्यर्थी के तौर पर सामने आता था.
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मेडिकल कॉलेज में दाखिले तक पहुंचा था नेटवर्क
EOU के अनुसार गिरोह का काम सिर्फ परीक्षा में स्कॉलर बैठाने तक सीमित नहीं था. फर्जी जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए मेडिकल कॉलेज की काउंसलिंग में भी फायदा लेने की कोशिश की जाती थी.
जांच एजेंसी ने बायोमेट्रिक वेंडरों, फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वालों और इस तरीके से दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों की पहचान शुरू कर दी है. इन सभी के खिलाफ आगे कार्रवाई की तैयारी चल रही है.
जांच में और लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद
NEET UG और Re-NEET मामलों की जांच अब सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. EOU इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका पता कर रही है.
जांच में मिले चेक, एडमिट कार्ड, परीक्षा बुकलेट, फर्जी प्रमाण पत्र और एग्जाम सेंटर से जुड़े कागजात के आधार पर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है. आगे इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
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