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Bihar Election 2020: सीमांचल में मुस्लिम वोट बैंक के दावेदारों में घमासान, NDA-महागठबंधन के बीच ओवैसी फैक्टर प्रभावित करेगा परिणाम?

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
सीमांचल में मुस्लिम वोट बैंक के दावेदारों में घमासान, NDA-महागठबंधन के बीच ओवैसी फैक्टर प्रभावित करेगा परिणाम?
सीमांचल में मुस्लिम वोट बैंक के दावेदारों में घमासान, NDA-महागठबंधन के बीच ओवैसी फैक्टर प्रभावित करेगा परिणाम?
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Bihar Assembly Election 2020: बिहार चुनाव के तीसरे चरण में 7 नवंबर को 78 सीटों पर वोटिंग है. तीसरे चरण में 1,208 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. यहां शनिवार को वोटिंग होनी है. इस चरण में मुस्लिम बहुल सीमांचल से लेकर यादव बहुल कोसी, ब्राह्मण बहुल मिथिलांचल की सीटों पर वोटिंग होगी. सीमांचल में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी के बीच मुस्लिम वोट बैंक के लिए सियासी घमासान मचना तय है. बड़ा सवाल है ओवैसी फैक्टर परिणाम को कितना प्रभावित करेगा? Bihar Election 2020 Live News से जुड़ी हर खबर के लिये बने रहिये prabhatkhabar.com पर.

महागठबंधन के सामने बड़ी चुनौती

सीमांचल की राजनीति में ओवैसी फैक्टर को नजरंदाज करना महागठबंधन के लिए आसान नहीं है. AIMIM के चीफ ओवैसी वो चेहरा हैं, जिनसे पार पाना महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. जानकारों के मुताबिक बिहार के मदरसों में आधुनिकीकरण और दूसरे सकारात्मक बदलाव के दम पर जदयू को मुस्लिम वोटबैंक के साथ होने का अंदाजा है. जबकि, बीजेपी तीन तलाक के मुद्दे को मददगार फैक्टर मान रही है. उम्मीद है कि बीजेपी के समर्थन में सीमांचल की मुस्लिम महिलाएं वोट कर सकती हैं. Bihar Chunav 2020 से जुड़ी हर खबर के लिये बने रहिये prabhatkhabar.com पर

मुस्लिमों के हाथ में सीमांचल की चाबी

सीमांचल के चार जिलों की 24 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका गेमचेंजर की है. इन चार जिलों में किशनगंज में करीब 70 फीसदी, अररिया में 42 फीसदी, कटिहार में 43 फीसदी और पूर्णिया में 38 फीसदी मुस्लिम वोटबैंक हैं. सीमांचल की 14 सीटों पर AIMIM के प्रत्याशी हैं. महागठबंधन में शामिल राजद 11, कांग्रेस 11, भाकपा-माले 1 और सीपीएम 1 सीट पर चुनाव लड़ रही है. एनडीए की बात करें तो बीजेपी ने 12, जेडीयू ने 11 और हम पार्टी ने एक सीट पर चुनाव में प्रत्याशी दिए हैं.

तस्लीमुद्दीन गुजर गए, नाम जिंदा है...

सीमांचल की राजनीति में तस्लीमुद्दीन को गांधी कहा जाता है. उनकी सीमांचल की सियासत पर गहरी पकड़ रही. उनके गुजरने के बाद सीमांचल में अल्पसंख्यक राजनीति में बिखराव आया. इसी बिखराव का फायदा उठाकर ओवैसी ने दिवंगत तस्लीमुद्दीन के पुत्र शाहनवाज आलम को जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है. राजद ने उनके भाई सरफराज आलम को टिकट दिया है. अब, मुस्लिम वोटबैंक के दो बड़े दावेदार उलझ गए हैं. जानकारों के मुताबिक AIMIM के चलने का फायदा बीजेपी को मिलेगा.

Posted : Abhishek.

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