उपेक्षा . रख-रखाव के अभाव में वर्षों से खराब पड़े हैं नलकूप
बंद रहने से सिंचाई में किसानों को परेशानी
शाहपुर : प्रखंड के ज्यादातर सरकारी नलकूप कृषि कार्यों के लिए अनुपयोगी एवं बेकार हो चुके हैं. रख-रखाव नहीं होने के कारण नलकूप जर्जर भी हो गये हैं. इसका सीधा असर प्रखंड के किसानों पर पड़ रहा है.
उनके खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है. लिहाजा उन्हें ऐसी खेती करनी पड़ती है, जिसमें पटवन की जरूरत नहीं पड़ती हो. किसान चाह कर भी सब्जियों तथा अन्य फसलों की खेती नहीं कर पाते हैं. क्योंकि डीजल जला कर पटवन करने से लागत बढ़ जाती है और मेहनत के अनुरूप उसका मुनाफा नहीं हो पाता है. नलकूप खराब रहने से किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. नलकूप बंद पड़े हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ऐसे में किसान अपने निजी बोरिंग के सहारे खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, जो काफी महंगी साबित हो रही है.
लगभग सात हजार एकड़ भूमि की सिंचाई पर प्रतिकूल असर :
प्रखंड के ये नलकूप किसानों के लिए बेकार हो चुके हैं, जिसके कारण प्रखंड की कुल कृषि योग्य सिंचित क्षेत्रफल 10 हजार में से सात हजार एकड़ भूमि, जो इन नलकूपों के सहारे थी,उनकी सिंचाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
प्रखंड में हैं कुल 30 नलकूप
प्राप्त जानकारी के अनुसार शाहपुर प्रखंड के विभिन्न गांवों में कुल 30 राजकीय नलकूप लगाये गये हैं, परंतु फिलहाल दो- तीन नलकूपों को छोड़ कर शेष सभी नलकूप विद्युत या यांत्रिक दोषों के कारण दशकों से बंद हैं. अधिकतर नलकूप बिजली दोष के कारण काम नहीं कर रहे हैं.
सुधार के लिए लगायी गुहार : कृषकों द्वारा प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक इन नलकूपों की दशा में सुधार लाने के लिए गुहार लगायी गयी, परंतु सबकुछ बेकार हो गया. इन नलकूपों को दुरुस्त कराने में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल रहा. हालांकि जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार के आलाधिकारियों तक नलकूपों की दयनीय स्थिति को लेकर इसे दुरुस्त कराने के वास्ते हमेशा से ही किसानों को आश्वासन दिया जाता रहा है, जो सिलसिला आज भी जारी है.
