पांच दर्जन मजदूर गिरफ्तार, नौ नावें जब्त

कार्रवाई. सोन नद में अवैध बालू उत्खनन की मिल रही शिकायतों पर चला प्रशासन का डंडा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 19 जनवरी से बालू उत्खन्न पर लगा रखी है रोक कोइलवर : कोइलवर सोन नद में सुनहले रेत के काले कारोबारियों पर सोमवार को भोजपुर प्रशासन का डंडा चला, जिसमें तीन दर्जन से ज्यादा मजदूर, […]

कार्रवाई. सोन नद में अवैध बालू उत्खनन की मिल रही शिकायतों पर चला प्रशासन का डंडा

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 19 जनवरी से बालू उत्खन्न पर लगा रखी है रोक
कोइलवर : कोइलवर सोन नद में सुनहले रेत के काले कारोबारियों पर सोमवार को भोजपुर प्रशासन का डंडा चला, जिसमें तीन दर्जन से ज्यादा मजदूर, नाविक समेत उत्खनन में लाये जाने वाले कई सामान जब्त किये गये. भोजपुर प्रशासन के आला अधिकारी सदर एसडीओ नवदीप शुक्ला, एसडीपीओ संजय कुमार, अभियान एएसपी मो साजिद, कोइलवर थानाध्यक्ष संजय शंकर, चांदी थानाध्यक्ष धनंजय शर्मा सहित दर्जनों की संख्या में पुलिस के जवान अहले सुबह सोन नद पहुंचे व सोन नद की अविरल धारा में पहुंच बालू के अवैध उत्खनन में लगे नावों व मजदूरों को हिरासत में ले लिया. इसके बाद सोन नद में बालू कटाई कर रहे सैकड़ों नावों के चालकों के बीच हडकंप मच गया व नाव को गंगा की ओर लेकर भागने लगे.
अहले सुबह हुई छापेमारी : रोक के बावजूद बड़े-बड़े नावों द्वारा सोन नद से अवैध उत्खनन की मिल रही शिकायतों के बाद भोजपुर प्रशासन ने अहले सुबह से ही छापेमारी अभियान चलाया, जो सोमवार को पूरे दिन चलता रहा. दोपहर तक हुई छापेमारी के दौरान पुलिस ने नौ नावें, पांच दर्जन मजदूर समेत बैटरी, कुदाल, टोकरी, बाल्टी समेत कई सामान जब्त किये.
सभी भेजे गये जेल : सोन नद कोइलवर के क्षेत्र में सुनहले रेत का काला कारोबार चलाने वाले लगभग चार नाविक समेत 60 मजदूरों को जिला सहायक खनन पदाधिकारी गोपाल सहाय ने रोक के बावजूद अवैध उत्खनन के आरोप में हिरासत में लिये गये मजदूरों पर कोइलवर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. इसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया. सूत्रों की माने, तो पकड़े गये नाविक व मजदूरों को छुड़ाने के लिए कई सफेदपोशों की घंटी पूरे दिन बजती रही.
भोजपुर में आठ बालू घाटों को है उत्खनन की मंजूरी : 19 जनवरी को एनजीटी द्वारा बालू उत्खनन, प्रेषण पर रोक के तीन माह बाद भोजपुर के आठ घाटों से बालू उत्खनन की मंजूरी मिली थी. वहीं, पटना जिले में 29 घाटों से बालू उठाव शुरू हुआ, जबकि छपरा जिले में एक भी बालू घाट से उत्खनन की मंजूरी नहीं होने के बावजूद प्रतिदिन लगभग दो हजार से ज्यादा बालू लदे नाव सुनहले रेत के काला कारोबार में लगे हैं. सूत्रों की माने, तो सुनहले रेत के काला कारोबार में छपरा प्रशासन व सफेदपोशों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है, जो छपरा प्रशासन को कटघरे में खड़ा करता है, क्योंकि वहां बिना किसी चालान के प्रतिदिन पांच हजार ट्रकों से बालू बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है.
प्रतिदिन होती थी लाखों रुपये की कमाई
19 जनवरी, 2016 से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोक के बावजूद सोन नद में नावों द्वारा बालू का अवैध उत्खनन जारी था, जिसके पैसे बंटवारे को लेकर दो महीने पूर्व पटना व भोजपुर जिले के दियारा क्षेत्र में जम कर गोलीबारी हुई थी, जिसमें एक की जान भी चली गयी थी. फिलहाल उस क्षेत्र में नावों का परिचालन कुछ कम था, जिसके बाद से प्रतिदिन लगभग दो हजार नाव बालू के अवैध उत्खनन में लगे थे, नदी के रास्ते सीधे छपरा जिले में पहुंचता था. इससे प्रतिदिन लाखों रुपये की कमाई होती है.

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