डायरिया का कहर, दो की मौत

त्रासदी. चंदवा में फिर मिले पांच नये मरीज, संख्या पहुंची 25 के पार आरा/जगदीशपुर : बाढ़ की त्रासदी झेल चुके लोगों पर अब डायरिया कहर टूट पड़ा है. यह सिलसिला बाढ़ के पानी निकलने के बाद से ही शुरू है, जो अब भी जारी है. जिले के जगदीशपुर थाने के महादलित टोला के रहने वाले […]

त्रासदी. चंदवा में फिर मिले पांच नये मरीज, संख्या पहुंची 25 के पार

आरा/जगदीशपुर : बाढ़ की त्रासदी झेल चुके लोगों पर अब डायरिया कहर टूट पड़ा है. यह सिलसिला बाढ़ के पानी निकलने के बाद से ही शुरू है, जो अब भी जारी है. जिले के जगदीशपुर थाने के महादलित टोला के रहने वाले दो मासूमों की डायरिया से इलाज के दौरान मौत हो गयी. घटना मंगलवार की देर शाम की है. जगदीशपुर नगर के महादलित टोला स्थित मुसहर टोली में कई लोग डायरिया से पीड़ित हैं. इनमें चिंटू को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया है,
जबकि 65 वर्षीय महिला समेत तीन का इलाज प्राइवेट क्लिनिकों में चल रहा है. मंगलवार को मंगल मुसहर का पुत्र शंकर मुसहर व उमेश मुसहर की पुत्री आरती कुमारी को जगदीशपुर स्थित संत मैरी स्वास्थ्य केंद्र में भरती कराया गया था, जहां देर शाम दोनों ने दम तोड़ दिया, जबकि मुसहर टोली के ही तेतर मुसहर के पुत्र चिंटू को चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया. लाल बाबू राम की पुत्री नीलम कुमारी, मटुरी कुमारी तथा पनपतीया कुंवर का इलाज प्राइवेट क्लिनिक में चल रहा है. वहीं, मंगलवार को डायरिया के पांच नये मरीजों के मिलने से अकेले नवादा थाने के चंदवा में मरीजों की संख्या 25 के पार पहुंच गयी है. सिविल सर्जन के नेतृत्व में चंदवा गांव में चिकित्सकों की एक टीम कैंप कर रही है. मंगलवार को डायरिया की चपेट में आने से ढाई साल की चांदनी, जयप्रकाश मुसहर, हनुमान मुसहर, करिया मुसहर व करण मुसहर को अस्पताल में भरती कराना पड़ा.
डायरिया पीड़ित बच्चों का इलाज करते डॉक्टर.
शिशु जल्द होते हैं डायरिया के शिकार
डायरिया को शिशुओं की मौत का बड़ा कारण माना गया है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार पांडेय के अनुसार, ठंड से बचाव न होने पर दस्त शुरू हो जाता है. यदि ठंड का इंतजाम नहीं किया गया, तो यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है.
कैसे करें उपचार
सदर अस्पताल के डीएस व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सतीश कुमार सिन्हा के मुताबिक केले, चावल, सेब का मुरब्बा और टोस्ट के मिश्रण के इस्तेमाल से राहत मिलती है. केले और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त को बांधने में सहायक होते हैं.
उबाल कर ही पानी का इस्तेमाल करें
सदर अस्पताल में कार्यरत डाॅक्टर विनोद कुमार का कहना है कि बरसात में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. अन्य उपाय के साथ लोगों को पानी उबाल कर पीना चाहिए व सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए.
टंकी का पानी पीकर हो रहे बीमार
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा आजादी के समय के पाइप लाइन से आज भी कई मुहल्लों व दलित बस्तियों में पानी की सप्लाइ की जाती है. जर्जर व फटे पाइप लाइन से सप्लाइ के कारण पानी पीने लायक नहीं रहता है. परंतु शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के अभाव में दलित बस्ती के लोगों को सप्लाइ का गंदा पानी पीना पड़ रहा है. इसी का नतीजा है कि चंदवा दलित बस्ती में डायरिया पीड़ितों की संख्या सबसे अधिक है.

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