दुखद. डॉक्टर से फरियाद सुनाते-सुनाते रो पड़ा सेवानिवृत्त फौजी
आरा : नगर थाने के धरहारा निवासी 85 वर्षीय रामछपित सिंह ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिसका लालन-पालन कर अपनी काया को जर्जर व कमजोर कर रहे हैं वही बुढ़ापे में सबसे ज्यादा कष्ट देगा. 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में दुश्मनों को अपने पराक्रम से परास्त करनेवाला बाप आज अपने बेटे से हार गया. कल देश के लिए जंग जीतनेवाला बूढ़ा बाप आज बेटे का सितम झेल रहा है. बुढ़ापे में जब उसे अपनों की आवश्यकता पड़ी,
तो इकलौते बेटे राजकुमार कुशवाहा ने मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया. दर्द की अधिकता से कराहता हुआ सेवानिवृत्त बुजुर्ग जवान किसी तरह सदर अस्पताल पहुंचा, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को अपना दुखड़ा सुनाते-सुनाते रो पड़ा. उसे मलाल है कि जिस हाथ की अंगुलियों को पकड़ कर कभी राजकुमार ने चलना सीखा था,
उसी को तोड़ दिया. वृद्ध रामछपित सिंह डबडबाई आंख और थरथराती जुबान से जब एक-एक कर अपने ऊपर हुए जुल्म की दास्तां सुनायी, तो उपस्थित हर व्यक्ति की आंख नम हो गयी.
जिस हाथ ने चलना सिखाया, उसी को बेटे ने तोड़ डालाबेटे के प्रेम प्रसंग का किया था विरोध
सेना के रिटायर्ड जवान रामछपित सिंह बेटे की जिद पर अपनी जिंदगी भर की सारी कमाई नर्सिंग होम खोलने के लिए दे दी. नर्सिंग होम खोलने के बाद पहले से शादीशुदा राजकुमार एक नर्स से प्रेम कर बैठा, जो रिटायर्ड फौजी को नागवार गुजरा. उसने इसका काफी विरोध किया. इसके बाद कुछ दिन के लिए राजकुमार घर से फरार हो गया. एक साल बाद जब वह घर लौटा, तो अपने वृद्ध बाप के साथ मारपीट शुरू कर दिया. इससे त्रस्त रामछपित सिंह ने बेटे के खिलाफ नगर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करायी. हालांकि उस वक्त पुलिस ने किसी तरह राजकुमार को समझा-बुझा कर मामला शांत करा दिया था.
