आरा : हम जीवन भर शांति की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं, लेकिन शांति मिल नहीं पाती, क्योंकि शांति तो अपने घर में ही विराजमान है़ उक्त बातें हनुमंत कथा के दूसरे दिन सुंदर कांड में निहित श्री हनुमान जी के चरित्र का वर्णन करते हुए परम पूज्य संत आचार्य प्रदीप भैया जी महाराज ने कहीं. उन्होंने कहा कि यश और नाम के लिए कार्य संपन्न नहीं होनी चाहिए बल्कि मानवता के कल्याण के लिए कार्य होनी चाहिए़ उन्होंने परिस्थिति व समय के परिप्रेक्ष्य में लोगों को सेवा, साधना एवं समपर्ण के लिए यश और नाम को त्याग कर मन में मानवता के लिए भाव होनी चाहिए,
जिससे मानवता का संपूर्ण कल्याण हो़ परम पूज्य संत आचार्य प्रदीप जी भैया ने कथा प्रसंग में कहा कि भटकने की कहीं जरूरत नहीं है़ सारा तत्व आपके अंदर विराजमान है़ वर्तमान समय में बस आपके अंदर पड़ी हुई ़ इन सारे तत्वों को टटोलने की आवश्यकता है़ मौके पर मुख्य यजमान संजय तिवारी, पूर्व विधायक संजय सिंह टाइगर, डॉ हरेंद्र पांडेय, राजेंद्र तिवारी, मृत्युंजय पाठक, अनंत चौधरी, डॉ अमरेंद्र कुमार, अभिमन्यु कुमार, अरुण क्रांति, डॉ अमरेंद्र शक्रवार,आनंद राज, पवन सिंह, कृष्ण देव सिंह, संजय कुमार, मोहित कुमार, प्रहलाद राम, जितेंद्र शुक्ला, राम कुबेर पांडेय, टिंकू, यशवंत सिंह, विशाल सिंह, राम बहादुर यादव आदि मौजूद थे़
