चैत माह में ही जेठ माह जैसी लहर से धरती की छाती के साथ-साथ इनसान का कलेजा भी सूखने शुरू हो गया है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है. आदमी के साथ ही जानवरों को भी पानी मिलना बमुश्किल होने लगा है. बावजूद जिला प्रशासन अथवा सरकारी स्तर पर पानी के संकट को दूर करने की दिशा में अभी तक कोई खास प्रयास नजर नहीं आ रहे.
जल संकट. कृषि कार्य बुरी तरह बाधित, किसान हो रहे मायूस इनसान के साथ पशु भी परेशान
चैत माह में ही जेठ माह जैसी लहर से धरती की छाती के साथ-साथ इनसान का कलेजा भी सूखने शुरू हो गया है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है. आदमी के साथ ही जानवरों को भी पानी मिलना बमुश्किल होने लगा है. बावजूद जिला प्रशासन अथवा […]

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने जारी किया हेल्प लाइन नंबर
आरा : चैत माह में ही जेठ माह जैसी लहर ने धरती की छाती के साथ-साथ इनसान का कलेजा भी सूखने शुरू हो गया हैं. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है. आदमी के साथ ही जानवरों को भी पानी पीना बमुश्किल होने लगा है.
बावजूद जिला प्रशासन अथवा सरकार स्तर पर पानी संकट को दूर करने की दिशा में अभी तक खास प्रयास नजर नहीं आते हैं. पुराने सरकारी चापाकलों एवं जलमीनारों के माध्यम से ही पेयजल संकट को दूर करने का प्रयास हो रहा है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की मानें तो पूरे भोजपुर जिले में धरती का जलस्तर 2 से 3 फीट नीचे चला गया है. पिछले कुछ सालों से औसत वर्षा नहीं होने के कारण ही यह स्थिति बनी है.
सिर्फ उन्हीं चापाकलों में पानी नहीं आ रहा है, जिनका 25-30 फीट ही पाइप डाले गये हैं, जिले के सभी सरकारी चापाकलों ने पानी देना बंद नहीं किया है, क्योंकि इन चापाकलों में 150 फीट गहराई में पाइप डाले गये हैं.
जिले के सभी प्रखंडों में पेयजल का संकट : शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट काफी बढ़ती जा रही है. सर्वत्र हाहाकार की स्थिति बनी हुई है. शहरों में जहां पीने, नहाने, कपड़े धोने की समस्या विकराल बनती जा रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इस सब के अलावा कृषि व पशुपालन प्रभावित होते जा रहें है.
विधायक कोटे से चापाकलों को लगाये जाने का निर्देश : वर्तमान में बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए सरकारी स्तर से सभी विधायकों को प्रति पंचायत में पांच-पांच नये चापाकल लगाने के निर्देश मिले हुए हैं, जबकि नगर पंचायत में 3 और शहरों के प्रति वार्ड 3 नये चापाकल लगाने के निर्देश मिले हैं. इस प्रकार कुल मिलाकर 2770 नये चापाकलों को लगाने के निर्देश मिले हैं.
विशेष परिस्थितियों के लिए टेलीफोन नंबर जारी : कार्यपालक अभियंता ने प्रसुन्न कुमार ने बताया कि जिन क्षेत्रों में सरकारी चापाकल खराब हैं, उनकी मरम्मत अथवा अन्य पेयजल संबंधित समस्या निदान के लिए निम्न नंबरों पर डायल किया जा सकेगा. टेलिफोन नंबर-06182239784 एवं टॉल फ्री नंबर-18001231121 है. इस पर शिकायत करने के तीन दिनों के अंदर समस्याओं का निदान संभव है.
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सरकारी चापाकलों की प्रखंडवार स्थिति
जिले के विभिन्न प्रखंडों में सरकारी चापाकलों की संख्या निम्न है-आरा में 2183, उदवंतनगर-1544, संदेश-1063, कोईलवर-1576, बडहरा-2172, पीरो-1915, तरारी-1554, गडहनी-982, चरपोखरी-984, सहार-1050, अगिआंव-1153, बिहिया-1639, शाहपुर-2017, जगदीशपुर-1871 है.
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि ये सभी चापाकल चालू हैं और लोगों को गंभीर पेयजल के संकट से नहीं गुजरना पड़ेगा. विभाग का यह भी कहना है कि प्रखंडों में कनीय अभियंता को जिम्मेवारी सौंपी गयी है कि जहां से भी चापाकलों की शिकायतें मिलती हैं, तुरंत उसकी मरम्मत करायें. उन्हें वाहन भी मुहैया कराये गये हैं.
आरा शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में जलमीनार की स्थिति
विभागीय अधिकारियों के अनुसार आरा शहर में 8 जलमीनार हैं, जो सभी चालू हैं और नियमित पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 20 जलमीनार है, जो सभी चालू हैं और नियमित आपूर्ति हो रही हैं.
क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता प्रसुन्न कुमार
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रसुन्न कुमार का कहना है कि यह पहाड़ी क्षेत्र नहीं हैं, इसलिए वहां जैसी स्थिति नहीं होगी. यह जरूर है कि जलस्तर 2-3 फीट नीचे चला गया है, जिससे कम गहराई में गाड़े गए निजी चापाकलों में पानी नहीं आ रहे हैं. 150 फीट गहराई में गाड़े गये सभी सरकारी चापाकल चालू हैं.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में 2 करोड़ की योजनाएं सरकार को भेजी जा रही है. पुराने बिगड़े हुए चापाकलों की मरम्म्त तेजी से करायी जा रही है. विधायक कोटे के तहत 2770 नये चापाकल लगाये जायेंगे. इसके साथ ही विशेष परस्थिति में पानी की ढुलाई भी की जायेगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि हमारे विभाग का कार्य नगर निगम क्षेत्र में सीमित है.