आरा : दानापुर रेल मंडल में राजस्व देने के मामले में पटना के बाद आरा रेलवे स्टेशन ही आता है. लेकिन यहां रेलयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाएं नगण्य हैं. स्टेशन परिसर में न यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त कुरसियां हैं, न शौचालय, न पीने के पानी, न साफ-सफाई की मुक्कमल व्यवस्था ही है. कुछेक घंटों को छोड़ दें,
तो आरा स्टेशन हमेशा यात्रियों से गुलजार रहता है. लेकिन गाड़ियों के इंतजार में 70 से 80 प्रतिशत यात्री कुरसियों के अभाव में खड़े ही रहते हैं. महिलाएं जमीन या ओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर बैठने के लिए मजबूर होती हैं. शौचालय के मामले में स्टेशन बहुत गरीब है. प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर शौचालय है, किंतु प्लेटफाॅर्म नंबर दो और तीन पर एक भी शौचालय नहीं है. इस कारण यात्रियों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है. पीने के पानी के लिए भी स्टेशन परिसर में पर्याप्त नल की व्यवस्था नहीं है. अब तो गरमी के दिन आ गये. ठंडे पानी की व्यवस्था सिर्फ एक नंबर प्लेटफॉर्म पर ही है.
जबकि दो और तीन पर कहीं भी नहीं है. इस कारण गरमी में यात्रियों की प्यास नहीं बुझ पाती है. वहीं साफ-सफाई के मामले में आरा स्टेशन बुरी तरह बदनाम है. पूरा स्टेशन परिसर में गंदगी, मलमूत्र, कूड़े-कचरे की भरमार है. स्टेशन परिसर के कोने-कोने में गंदगी देखी जा सकती है. स्थिति देखने से यही लगती है कि पूरे स्टेशन परिसर में 24 घंटे में एक बार ही साफ-सफाई की जाती है. बहरहाल रेल बजट के माध्यम से रेल मंत्रालय यात्रियों को लाख सुविधाएं देने का दावा करे, लेकिन हर बार दावे झूठे ही साबित होते हैं.
