बालू उठाव संघर्ष मोरचा समेत हजारों की संख्या में बालू उठाव बंद रहने से प्रभावित ट्रक, ट्रैक्टर, जेसीबी मालिक, नाविक संघ व बालू व्यवसाय से जुड़े लोगों ने कोइलवर पुल की पूर्वी छोर को जाम िकया.इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
बालू उठाव संघर्ष मोरचा ने किया प्रदर्शन
कोइलवर/चांदी : बालू व्यवसाय से जुड़े लोगों ने हाथों में तिरंगा लिए कोइलवर पुल के पूर्वी छोर के सड़क मार्ग पर यातायात ठप कर दिया़ इससे पुल के पुर्वी व पश्चिमी छोर पर वाहनों की लंबी कतार लग गयी. बालू उत्खनन बंद होने से मजदूरों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ा होने पर भाकपा माले के दर्जनों कार्यकर्ता भी चक्का जाम में शामिल थे़ जाम कर रहे लोगो ने कहा कि मंगलवार की हड़ताल सांकेतिक थी ज़ो सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक चली़
अगर सुनवार्इ नहीं गयी, तो सात मार्च से अनिश्चितकालिन हड़ताल की जायेगी. इधर,जाम से साइकिल सवार,दो पहिया वाहन से लेकर एंबुलेंस भी जाम में घंटो फंसे रहे़ आरा से कुर्जी जा रही एक गर्भवती महिला समेत आधा दर्जन एंबुलेंस पुल के उतरी लेन में फंसे होने के दो घंटे बाद अन्य छोटे वाहनों को पिछे से निकालते हुए सभी एंबुलेंस को पटना भेजा गया़ नेशनल ग्रीन ट्रब्यिूनल ने बिहार राज्य को पर्यावरण मामले में बने कानून के उल्लंघन का दोषी मानते हुये राज्य सरकार को सभी नदियों व खनन क्षेत्र में बालू के खनन व ढ़ुलाई पर रोक लगाने को कहा था़
ट्रब्यिूनल द्वारा पारित आदेश के आलोक में बिहार सरकार द्वारा बालू के उत्खनन पर रोक लगा दिया गया था़ हालांकि सरकार को 19 फरवरी को एक्षन टेकेन रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था़ लेकिन, रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने के कारण रोक नहीं हटी़ बताते चले कि कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के इस्टर्न जोन बेंच कोलकाता के द्वारा वाद संख्या 07/2016 ईजेड अमन कुमार सिंह बनाम बिहार सरकार व अन्य के आलोक में पारित आदेश में पर्यावरण अनापति प्रमाण पत्र प्राप्त किये बगैर राज्य के खनिज संपदा का उत्खनन,प्रेषण व परिचालन पर 19 जनवरी से ही रोक लगा दी गयी थी़
हर दिन लाखों के राजस्व की हो रही क्षति
बालू खनन में लगे कारोबारियों की मानें तो अकेले भोजपुर जिले की सोन नद के घाटों से प्रतिदिन लगभग पच्चीस लाख रूपये की राजस्व प्राप्ति होती है़ भोजपुर जिले में सतरह बालू घाट है जहॉ से बालू का उत्खनन होता है़ जबकि पटना व सारण जिले के बालू घाटो को जोड़ दिया जाये तो प्रतिदिन का राजस्व क्षति पैतालिस लाख रुपये तक पहुंच जाता है़ गौरतलब है कि 2016 के लिए भोजपुर, पटना व सारण जिले के लिए लगभग एक सौ अड़तीस करोड़ रुपये बालू खनन की बंदोबस्ती करायी गयी है़
