चरपोखरी : पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होने के साथ ही मुखिया जी के चुनावी तैयारियों पर पानी फिर गया. किरकिरी हो गयी मुखिया जी की पांच साल की राजनीति. मुखिया से चुनाव जीतने के बाद से ही अपने राजनीतिक जीवन और अगले चुनाव की तैयारी के लिए मुखिया जी ने ताना बाना बुनना शुरू कर दिया था, लेकिन आरक्षण के चक्कर ने सब किये- कराये पर मानो पानी ही फेर दिया.
यही नहीं इस आरक्षण रोस्टर के जारी होने से मुखिया जी के साथ -साथ उनके समर्थकों को भी परेशानी में डाल दिया है. मलौर, सोनवर्षा, नगरी, पसउर, सियाडीह एवं कोयल के मुखिया पद बदल जाने से राजनीतिक पृष्ठभूमि बदल गयी है. वहीं पुरुष एवं महिला सीट के बदल जाने से वर्तमान मुखिया समर्थकों को भी काफी परेशानी हो रही है. दूसरी तरफ पंचायत समिति, सरपंच, वार्ड सदस्य एवं पंच पद के लिए भी रोस्टर पर प्रतिनिधि अपनी नजर बनाये हुए हैं.
अब बना रहे हैं दूसरी रणनीति : मैं नहीं लडूंगा तो क्या हुआ मेरी पत्नी ही चुनाव लड़ेगी ,जी हां यह भी रणनीति बनने लगी है, रोस्टर बदल गया तो कैंडिडेट भी बदल गया, लेकिन अड़चनें तो तब आ रही है जब महिला पुरुष के बजाय जातीय रोस्टर बदल गया है.
रोस्टर जारी होते ही मुखिया के लिए आने लगे नाम : आरक्षण सूची का रोस्टर जारी होते ही पंचायतों में मुखिया पद के लिए संभावित उम्मीदवारों का नाम सामने आने लगा है. कई ऐसे उम्मीदवार देखे जा रहे हैं, जिनको आरक्षण का लाभ मिलते ही चुनाव लड़ने का ख्याल आ गया और अपने समर्थकों को गोलबंद करने में जुट गये. वहीं दूसरी तरफ कई महिला प्रत्याशियों का नाम भी सुखिर्यों में आने लगा है. जो कल तक चहारदीवारी में रहती थीं, वैसे उम्मीदवार भी चुनावी दंगल में अपना भाग्य आजमाने की तैयारी में हैं.
गांवों के चौक-चौराहों पर होने लगी है चर्चा
पंचायत चुनाव के रोस्टर जारी होने के साथ ही गांव के चौक-चौराहों पर मुखिया पद के लिए आरक्षण एवं उम्मीदवारों की चर्चा का बाजार गर्म होने लगा है. संभावित उम्मीदवारों के समर्थक अभी से ही चुनावी घेराबंदी शुरू कर दी है. वहीं मतदाता भी अपने नजदीकियों व मनपसंद उम्मीदवारों को चिह्नित करने लगे है.
