मुकदमे की तारीख पर आये व्यक्ति की पिटाई, दो गिरफ्तार

आरा : देश विकास कर रहा है.उस हिसाब से अपना बिहार भी बढ़ रहा है.पर आज भी कुछ की जिंदगी नहीं बदली कल भी वहीं थे आज भी वहीं हैं.दुख होता है की पेट की भूख मिटाने के लिए कुछ नौनीहाल आज भी कुड़े की ढेर में मरहम तलाश रहे हैं. इसकी चिंता किसी को […]

आरा : देश विकास कर रहा है.उस हिसाब से अपना बिहार भी बढ़ रहा है.पर आज भी कुछ की जिंदगी नहीं बदली कल भी वहीं थे आज भी वहीं हैं.दुख होता है की पेट की भूख मिटाने के लिए कुछ नौनीहाल आज भी कुड़े की ढेर में मरहम तलाश रहे हैं. इसकी चिंता किसी को नहीं है.अगर गलती से इनका झोला किसी के के शरीर को छु लेता है तो मानो कयामत ही आ गयी.
वह इन बच्चों से ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे ये बच्चे इस दुनियां के हैं ही नहीं .डिजीटल इंडिया हो या बढ़ता बिहार का यह भी एक सच है. शहर के अति व्यस्ततम इलाका महावीर टोला के पास रखे कुड़े की ढेर में तीन बच्चे अपनी पेट की भूख मिटाने के लिए कुड़ा बीन रहे थे.जैसे ही कैमरे का फ्लैश चमका तो बच्चे पूरी तरह से चौंक गये.पल-भर के लिए उन्हें यह समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है.अपने में बात करते हुए इधर-उधर भागने लगे.शायद यह सोच कर की उन्होंने कुछ गुनाह कर दिया हो.
सरकार के भरोसे हर काम,आपकी जिम्मेवारी कुछ नहीं : हर काम सरकार के भरोसे कुछ भी हुआ तो आंदोलन,धरना प्रदर्शन शुरू कर देते हैं लेकिन क्या इन नौनिहालों के लिए के हाथों में कुड़ा उठाने वाला थैला नहीं हो इसके लिए सभी को एक होकर इनके लिए मेहनत करनी होगी तभी देश और इनका भविष्य बेहतर होगा. केवल सरकार को कोसने से समाज का भला नहीं होगा .
किताबों की जगह कूड़ा उठाने वाला झोला
जिन हाथों में किताब होना चाहिए,उन हाथों में कुड़ा उठाने वाला थैला है. सुबह होते ही प्रतिदिन ये बच्चे पेट की आग बुझाने के लिए कुड़े की ढेर के पास इक्कठा होकर उसी में अपना भविष्य खोजने लगते हैं. इस रास्ते से कई नेता,प्रशासन और प्रबुध लोग आते जाते हैं इन पर नजरें भी पड़ती हैं लेकिन अनदेखा कर चले जाते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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