अधिगृहीत जमीन को तत्कालीन सीओ ने नियम ताक पर रख किया दाखिल-खारिज
आरा : उदवंतनगर अंचल कार्यालय का दाखिल-खारिज मामले में एक फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है़, जिसमें तत्कालीनअंचलाधिकारी राजशेखर द्वारा कसाप मौजा के भू-हदबंदी के अधिगृहीत जमीन को नियम व कानून को ताक पर रख दाखिल-खारिज कर दी गयी़.
उदवंतनगर अंचल के कसाप मौजा के खाता नंबर 67 ए, खेसरा 3459 तथा रकबा 0.70 डीसमील भूमि भू हदबंदी से अधिगृहीत करने के बाद संत लाल चमार के नाम पर परचा निर्गत किया गया था़, परंतु लाभार्थी द्वारा उक्त जमीन में 30 डिसमिल जमीन दीन दयाल राम के हाथों बेच दी गयी,
जो नियम विरुद्ध था़ भू-हदबंदी के अधिगृहीत जमीन को वर्षो पूर्व उक्त व्यक्ति के नाम से परचा निर्गत किया गया था़ ऐसी भूमि को परचा धारियों को दूसरे के नाम से बिक्री करने का कानून अधिकार नहीं है़ बावजूद इसके संत लाल चमार द्वारा परचा धारी जमीन को दूसरे हाथों के बेच दिया गया,
जिसके बाद कानून के रखवाले तत्कालीन सीओ राज शेखर द्वारा परचाधारी से बढ़ कर कानून को ताक पर रख बिक्री की गयी जमीन का दाखिल-खारीज भी कर डाला़ अंचल कार्यालय से उक्त जमीन का अरटीपीएस नंबर 1027 वाद संख्या 97/15,16 के द्वारा दाखिल खारिज कर दिया गया़ इसके बाद से ही दाखिल-खारिज सभी अभिलेख कार्यालय से गायब हो चुके है़ं इस मामले के प्रकाश में आने के बाद वरीय पदाधिकारी द्वारा अभिलेख मांगी जा रही है़
पर कार्यालय में नहीं मिल पा रही है़ विदित हो कि भू-हदबंदी से प्राप्त भूमि का क्रय-विक्रय करने का नियम नहीं है़ फिर भी उक्त जमीन की बिक्री की गयी. मामला प्रकाश में आने के बाद भी सीओ ने उक्त जमीन का दाखिल-खारिज स्वीकृत कर दिया़
