लिट्टी-चोखा भोज का चलन बढ़ा, रिश्तों में आयी गरमाहट

आरा : ठंड के मौसम में हर कोई लिट्टी-चोखा का आनंद लेना चाहता है. घी लगे लिट्टी के साथ स्वादिष्ट चोखा हो तो खाने का जायका ही बदल जाता है. आज जमाना भले ही आधुनिक हो गया हो, मगर अब भी ठंड के मौसम में लिट्टी-चोखा की डिमांड कम नहीं हुई है. ग्रामीण इलाके की […]

आरा : ठंड के मौसम में हर कोई लिट्टी-चोखा का आनंद लेना चाहता है. घी लगे

लिट्टी के साथ स्वादिष्ट चोखा हो तो खाने का जायका ही बदल जाता है. आज जमाना भले ही आधुनिक हो गया हो, मगर अब भी ठंड के मौसम में लिट्टी-चोखा की डिमांड कम नहीं हुई है.
ग्रामीण इलाके की कौन कहे शहरी क्षेत्रों में भी लिट्टी-चोखा पसंद करनेवाले लोगों की कमी नहीं है. अब तो जगह-जगह लोग लिट्टी – चोखा पार्टी आयोजित कर खाते-खिलाते नजर आते हैं.
लिट्टी-चोखे से रिश्तों में आती है गरमाहट
लिट्टी-चोखे की पार्टी जहां आयोजित होती है, वहां खानेवाले लोग ही
बनानेवाले लोग में शामिल होते
हैं. कोई गोइठा लाता है, तो कोई सत्तु
और कोई चोखा का सामान. लिट्टी-चोखा में प्रयोग में आनेवाली वस्तुओं को एकत्रित कर देर शाम से लिट्टी-चोखा बनाने का कार्य शुरू होता है और फिर दो घंटे में बन कर तैयार हो जाता है लजीज लिट्टी-चोखा.
इसके बाद बढ़ती है भाइयों की पंगत और हर कोई इसका आनंद चाव से उठाता है. साथ बैठ कर खाने से लोगों के बीच रिश्तों में गरमाहट आती है. लोग एक दूसरे के सुख-दुख में साझीदार बनते हैं एवं भाईचारे की भावना भी प्रगाढ़ होती है.

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