आरा/जगदीशपुर : आर्थिक तंगी के कारण कई वर्षों से बेड पर पड़ा असहाय कन्हैया अपने इलाज एवं मदद के लिए किसी अजनबी को भगवान बन कर अपनी जिंदगी में आने का इंतजार कर रहा है और इसके लिए बेड पर पड़े दिन में कई बार भगवान से प्रार्थना करते-करते थक चुका है,
लेकिन आज तक प्रशासनिक मदद मिलना तो दूर गरीब के लिए कार्य करने, असहाय की लड़ाई लड़ने व उनके हक अधिकार दिलाने की बात कह कर गरीबों के मत लेकर विधानसभा तथा लोक सभा पहुंचनेवाले जनप्रतिनिधि भी इस व्यक्ति का सुधी लेना भी मुनासिब नहीं समझते.
सामाजिक संस्था जो वृद्धि व असहायों के नाम पर कार्य करनेवाले संस्था का राह देखते-देखते बेड पर पड़ा कन्हैया अब जिंदगी से मायूस हो गया है और कह रहा है ऐसी घुट-घुट कर जिल्लत व परेशानीवाली जिदंगी जीने तथा गरीब माता-पिता के कंधों पर बोझ बनने से अच्छा होता कि काश भगवान इस गरीब लाचार असहाय व्यक्ति का जिदंगी छिन लेते तो अच्छा होता.
पेशे से भुंजा भुजनेवाले गोड जाति में जन्म लेनेवाले जगदीशपुर वार्ड नंबर 17 निवासी पिता मुसाफिर गोड व माता लाल मुन्नी देवी का 32 वर्षीय पुत्र कन्हैया गोड उर्फ नहारी गोड छह वर्ष पूर्व आर्थिक तंगी से परेशान होकर जीविकाेपार्जन के लिए गुजरात के राजकोट गया था. फैक्टरी से कार्य कर वापस घर लौटने के क्रम में ओवरब्रिज पर वाहन से चकमा खाकर पुल से नीचे गिर पड़ा और गंभीर रूप से जख्मी हो गया. जख्मी भी ऐसा की उठने की स्थिति में नहीं रहा.
तब आसपास के लोगों ने मानवता दिखाते हुए अस्पताल तक पहुंचा कर प्रारंभिक इलाज को करा दिया, लेकिन रीढ़ की हड्डी में चोट लगने की वजह से इलाज में काफी रुपयों की जरूरत थी. आर्थिक तंगी के कारण कन्हैया परिजनों के सहारे अपने गांव जगदीशपुर आना ही उचित समझा. तब से आज तक कन्हैया घर में बेड पर पड़ा है.
