आजादी में अकली ने िदया था योगदान

आरा : 1942 की अमर शहीद अकली देवी का शहादत स्मृति समारोह श्रीकृष्ण चेतना समिति के सभागार में शहीद अकली देवी स्मृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष राम सकल सिंह भोजपुरिया की अध्यक्षता में मनाया गया. इसका उद्घाटन विधान पार्षद राधा चरण सेठ ने दीप प्रज्वलित कर किया. संचालन उपेंद्र पासवान, स्वागत भाषण सचिव बबन पंडित […]

आरा : 1942 की अमर शहीद अकली देवी का शहादत स्मृति समारोह श्रीकृष्ण चेतना समिति के सभागार में शहीद अकली देवी स्मृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष राम सकल सिंह भोजपुरिया की अध्यक्षता में मनाया गया. इसका उद्घाटन विधान पार्षद राधा चरण सेठ ने दीप प्रज्वलित कर किया. संचालन उपेंद्र पासवान, स्वागत भाषण सचिव बबन पंडित एवं धन्यवाद ज्ञापन वीर बहादुर सिंह ने किया.

अपने संबोधन में एमएलसी राधा चरण सेठ ने कहा कि शहीद अकली देवी उन विरांगनाओं में से एक थी, जिसने देश की आजादी के लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ी. लेकिन, भारतीय इतिहासकारों ने शहीद अकली के साथ-साथ लसाढी के 12 शहीदों को उचित सम्मान नहीं दिया. अगर अकली देवी राजघराने की बेटी होती हो उनका भी नाम आज इतिहास के पन्ने में होता.

समारोह में प्रस्ताव पारित किया गया कि शहीद अकली देवी सहित 1942 के कुल 44 शहीदों की प्रतिमा जिला समाहरणालय पर लगायी जायी. सभा को डॉ रघुवर प्रसाद चंद्रवंशी, बाबूनंद यादव, वीरेंद्र यादव, देवेंद्र पदयात्री, जितेंद्र सिंह, सुरेश यादव, रामजी यादव, नंद जी पासवान, सुरेंद्र आजाद, भगवान पासवान, धर्मेंद्र यादव, शेषनाथ यादव, नंद किशोर सिंह, कन्हैया यादव, गुप्तेश्वर शर्मा, जवाहर पासवान, नगेंद्र सिंह, निखिल, सत्य नारायण यादव, चंदन पासवान आदि थे.

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