दशकों बाद भी शाहपुर में मुफलिसी कायम

बिहिया़ : बिहार की राजनीति में कभी शाहपुर और ताजपुर विधानसभा क्षेत्रों की विशेष रूप से चर्चा होती थी़ शाहपुर की पहचान जहां समाजवादी नेता पंडित रामानंद तिवारी से थी, वहीं ताजपुर की चर्चा जननायक कर्पूरी ठाकुर से जुड़ी थी़ बाद के समय में शाहपुर ने पंडित बिन्देश्वरी दूबे के रूप में बिहार का मुख्यमंत्री […]

बिहिया़ : बिहार की राजनीति में कभी शाहपुर और ताजपुर विधानसभा क्षेत्रों की विशेष रूप से चर्चा होती थी़ शाहपुर की पहचान जहां समाजवादी नेता पंडित रामानंद तिवारी से थी,

वहीं ताजपुर की चर्चा जननायक कर्पूरी ठाकुर से जुड़ी थी़ बाद के समय में शाहपुर ने पंडित बिन्देश्वरी दूबे के रूप में बिहार का मुख्यमंत्री व शिवानंद तिवारी जैसा सशक्त नेता भी दिये़ दशकों तक राजनीति में विशेष पैठ रखने वाले इन नामचीन नेताओं के बावजूद शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की कई समस्याएं सुरसा की तरह मुंह बाए आज भी खड़ी है़ं

वादों की बरसात, नहीं सुधरे हालात : शाहपुर प्रखंड के दियारा क्षेत्र के 75 गांवों को आर्सेनिकयुक्त पेयजल से मुक्ति दिलाने को लेकर हर बार जनप्रतिनधियों द्वारा वायदे किये गये परन्तु आजतक दियारा क्षेत्र के लोगों लोगों को जहरीले पेयजल से मुक्ति नहीं मिल सकी़ राज्य सरकार द्वारा इस क्षेत्र को आर्सेनिकयुक्त पेयजल से मुक्ति दिलाने के लिए 2 अरब, 46 करोड़, 45 लाख स्वीकृत किये जा चुके हैं परन्तु वर्ष 2012 से ही यह योजना जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से लंबित पड़ा हुआ है़

सीमा विवाद का हल जरूरी : शाहपुर के दियारा इलाके में कई दशकों से बिहार-यूपी सीमा विवाद को लेकर संकट बना हुआ है. जिससे प्रत्येक वर्ष इस क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ भूमि पर फसल कटनी के समय विवाद पैदा होता रहता है़ 1980 से 90 के दशक में तो इस विवाद को लेकर कई लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है़

दियारा क्षेत्र में हर वर्ष गर्मी के मौसम में अगलगी की घटना होती रहती है जिससे सैकड़ों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हो जाते हैं. फिर भी दमकल की स्थायी व्यवस्था इस क्षेत्र में नहीं हो सकी़ किसानों की सिंचाई की समस्या भी मुंह बाए खड़ी है़

सिंचाई के संसाधनों की कमी :

शाहपुर व बिहिया प्रखंड के कुल 94 नलकूपों में से महज 19 नलकूप ही चालू अवस्था में हैं. प्रत्याशी जनता के इस सवालों पर निरुत्तर होते दिख रहे हैं. शाहपुर नगर पंचायत में जहां वाहन पड़ाव के अभाव में रोजाना जाम लगता है. वहीं बिहिया नगर में भी वाहन पड़ाव के अभाव में लोगों को तपती धूप में गाड़ियों का इंतजार करना पड़ रहा है़ बिहिया व शाहपुर प्रखंड में युवाओं के लिए एक भी डिग्री कॉलेज नहीं होना प्रत्याशियों को युवा वर्ग का कोपभाजन बना रहा है़ इन दोनों प्रखंडों के कई गांवों में आज भी बिजली व सड़क का नहीं होना उम्मीदवारों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है़

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